रायपुर। भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता तनाव और अनिश्चित भविष्य—आज का इंसान मानसिक रूप से जितना उलझा हुआ है, शायद उतना पहले कभी नहीं था। ऐसे समय में ‘मेडिटेशन’ यानी ध्यान न केवल एक विकल्प, बल्कि एक आवश्यकता बन गया है। न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनियाभर में लोग अब मानसिक शांति और स्थिरता के लिए मेडिटेशन की ओर लौट रहे हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान
विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना 10 से 20 मिनट का ध्यान मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और तनाव को कम करने में बेहद प्रभावी है। खासकर वर्क फ्रॉम होम कल्चर, सोशल मीडिया की लत और व्यक्तिगत असंतुलन ने युवाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन को बढ़ाया है। मेडिटेशन इस स्थिति में एक स्वाभाविक समाधान है।
सरकारी और निजी संस्थानों की पहल
आयुष मंत्रालय, योग संस्थान, और कई निजी कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को माइंडफुलनेस और मेडिटेशन सेशंस में शामिल कर रही हैं। इससे प्रोडक्टिविटी तो बढ़ ही रही है, साथ ही कर्मचारियों में सकारात्मकता और आत्म-संयम भी दिखाई दे रहा है।
बच्चों और विद्यार्थियों के लिए जरूरी
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि मेडिटेशन को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इससे बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, भावनात्मक संतुलन और आत्मनियंत्रण विकसित होता है। हाल ही में सीबीएसई और एनसीईआरटी द्वारा कुछ स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत मेडिटेशन सेशंस की शुरुआत की गई है।
वैज्ञानिक प्रमाण भी मौजूद
हाल की कई रिसर्च बताती हैं कि नियमित ध्यान से ब्रेन की ग्रे मैटर की मोटाई बढ़ती है, जिससे निर्णय क्षमता और स्मरणशक्ति बेहतर होती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के अनुसार, मेडिटेशन करने वाले लोगों में तनाव हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का स्तर कम पाया गया।
कैसे करें शुरुआत?
मेडिटेशन की शुरुआत के लिए किसी बड़े ज्ञान की जरूरत नहीं। आप एक शांत स्थान पर बैठकर केवल सांसों पर ध्यान केंद्रित करके भी शुरुआत कर सकते हैं। मोबाइल एप्स, यूट्यूब गाइडेड सेशंस और योग प्रशिक्षकों की मदद से इसे और बेहतर तरीके से अपनाया जा सकता है।
आज जब मानसिक समस्याएं वैश्विक महामारी का रूप ले रही हैं, मेडिटेशन एक सहज, सस्ता और प्रभावी उपाय बनकर उभर रहा है। अब जरूरत है इसे नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने की, ताकि हम बाहरी दुनिया की हलचल में भी अंतर्मन की शांति खोज सकें।




