जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी. पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ था.
इसलिए जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का समय अत्यंत शुभ और विशेष माना जाता है, मान्यता है कि इसी पवित्र क्षण में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था.
जन्माष्टमी की रात का यह शुभ मुहूर्त हर साल की तरह सीमित समय के लिए होता है, इसलिए इस पवित्र अवधि में ही पूजा और जन्मोत्सव के कार्यक्रम करने का विशेष महत्व है.
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुणेश कुमार शर्मा के मुताबिक, इस बार जन्माष्टमी पर रात्रिकाल की पूजा का शुभ मुहूर्त 16 अगस्त की रात 12.04 बजे से लेकर 12.47 बजे तक रहेगा.
यानी कान्हा का जन्म कराने और विधिवत पूजा के लिए 43 मिनट की शुभ घड़ी रहेगी. इसी शुभ मुहूर्त में रात्रिकाल की पूजा होगी.
इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा, भजन और मंत्रजाप का विशेष महत्व बताया गया है.
शुभ मुहूर्त के दौरान ही खीरे से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कराने की परंपरा भी निभाई जाती है.
इसका अलावा जन्माष्टमी पर व्रतधारी भक्त 17 अगस्त की सुबह 05:51 बजे व्रत का पारण कर सकते हैं.




