रायपुर। गणेशोत्सव से पहले रायपुर केंद्रीय जेल के कैदियों ने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश की है। जेल में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे छह कैदियों ने मिट्टी से भगवान गणेश की आकर्षक और इको-फ्रेंडली प्रतिमाएँ तैयार की हैं। इन प्रतिमाओं को “जेल एम्पोरियम” में प्रदर्शनी और बिक्री के लिए रखा गया है, जहाँ आम लोग इन्हें बेहद किफायती दामों पर खरीद सकते हैं।
जेल प्रशासन के मुताबिक, इस पहल से कैदियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है और उनकी छिपी हुई कला भी सामने आ रही है। अधिकारी मानते हैं कि ऐसी गतिविधियाँ कैदियों में आत्मविश्वास बढ़ाती हैं और उनके पुनर्वास में मददगार साबित होती हैं।
Read Also- गौ सेवा पर राजनीति भारी, डॉक्टर नदारद – आयोग अध्यक्ष ने खुद खोली पोल
सस्ती और सुलभ प्रतिमाएँ
कैदियों द्वारा बनाई गई इन गणेश प्रतिमाओं की कीमत मात्र ₹51, ₹251 और ₹351 रखी गई है। इनकी बिक्री जेल परिसर स्थित “जेल एम्पोरियम” और बाहर लगाए गए विशेष स्टॉल पर की जा रही है। आमजन यहाँ से प्रतिमाएँ खरीदकर न सिर्फ अपनी आस्था को पूरा कर रहे हैं, बल्कि कैदियों की मेहनत और सुधार की यात्रा में भी भागीदार बन रहे हैं।
आस्था और पर्यावरण का संगम
प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों के विपरीत ये गणेश प्रतिमाएँ पूरी तरह मिट्टी से तैयार की गई हैं। विसर्जन के बाद ये मूर्तियाँ पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचातीं। इस तरह यह पहल आस्था और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
Read Also- छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: अस्पताल में अंधेरा, मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ प्रसव, मां-बच्चा सुरक्षित
लोगों का कहना है कि ये प्रतिमाएँ न केवल सुंदर और सस्ती हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। जेल प्रशासन का प्रयास है कि आने वाले समय में इस तरह की पहल को और अधिक बढ़ावा दिया जाए, ताकि कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिल सके।




