रायगढ़।छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की दुकानें तो खूब चलती हैं, लेकिन इस बार एसीबी-ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने आबकारी विभाग के एक “सेल्समैन” को रंगे हाथ पकड़ लिया। जनाब का नाम है संतोष कुमार नारंग, पद – उप निरीक्षक, काम – सरकारी सेवा, और शौक – 50 हजार की रिश्वत वसूली।
रिश्वत की डिमांड: “एक्स्ट्रा चार्ज” का सरकारी वर्जन
कहानी शुरू होती है 19 अगस्त 2025 को। रायगढ़ के धर्मजयगढ़ इलाके में नारंग साहब पहुंचे और शिकायतकर्ता सुनीत टोप्पो पर अवैध शराब बनाने का आरोप मढ़ दिया। इसके बाद घरवालों से कागजों पर हस्ताक्षर भी करवा लिए।

फिर डील पक्की हुई –
“50 हजार दो, वरना केस में उलझा दूँगा।”
लेकिन सुनीत टोप्पो ने हार मानने के बजाय सोचा – “चलो एक बार सिस्टम को ही सिस्टम से भिड़वाते हैं।” और सीधे एसीबी पहुंच गए।
ट्रैप प्लान: रिश्वतखोर की वाट लग गई
एसीबी ने पहले आरोप की सत्यापन जांच की। सब कुछ सही निकला तो 30 अगस्त 2025, शनिवार को ऑपरेशन शुरू हुआ।
शिकायतकर्ता को 50 हजार रुपए देकर खरसिया आबकारी कार्यालय भेजा गया। जैसे ही नारंग साहब ने नोटों को हाथ लगाया, एसीबी की टीम ने उनका कलेक्शन काउंटर बंद कर दिया।
सबूत और गिरफ्तारी: “कैश विदाउट रसीद”
टीम ने मौके से पूरे ₹50,000 कैश बरामद कर लिया। नारंग को वहीं से उठाकर ले जाया गया और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 में अपराध दर्ज किया गया।
जनता की राय: “आखिरकार पकड़े गए!”
रायगढ़ के लोगों का कहना है कि आबकारी विभाग में रिश्वत कोई नई बात नहीं।
“ये तो वही कहानी है – सरकारी वर्दी, सरकारी टेबल और अंडर द टेबल डील।”
लेकिन इस कार्रवाई से आम लोगों में भरोसा जगा है कि अब शायद अफसर लोग “रिश्वत का मीटर” धीरे करें।
एसीबी का संदेश: “लाइन में लग जाओ”
एसीबी-ईओडब्ल्यू के अफसरों ने साफ कहा –
“भ्रष्टाचारियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। चाहे कोई भी हो, पकड़े जाओगे तो सीधे जेल जाओगे।”




