रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की दिशा में तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। राज्य सरकार के निर्देश पर डीजीपी अरुणदेव गौतम ने इस प्रणाली के लिए रूपरेखा तैयार करने हेतु एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति में शामिल वरिष्ठ अधिकारी
प्रदीप गुप्ता (एडीजी) के नेतृत्व में गठित समिति में शामिल अन्य सदस्य इस प्रकार हैं:
- अजय यादव – पुलिस महानिरीक्षक (नारकोटिक्स)
- अमरेश मिश्रा – पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर रेंज
- ध्रुव गुप्ता – पुलिस महानिरीक्षक (अअवि)
- अभिषेक मीणा – उप पुलिस महानिरीक्षक (दूरसंचार)
- संतोष सिंह – उप पुलिस महानिरीक्षक (सीसीटीएनएस)
- प्रभात कुमार – पुलिस अधीक्षक (विआशा)
वहीं, वैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लोक अभियोजन संचालनालय की संयुक्त संचालक मुकुला शर्मा को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में समिति से जोड़ा गया है।
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क्या सोच रही है सरकार?
कमेटी यह अध्ययन कर रही है कि रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को छत्तीसगढ़ पुलिस एक्ट, 2007 के प्रावधानों के तहत लागू किया जाए या इसके लिए एक नया विधायी अधिनियम बनाया जाए।
अगर सरकार नया कानून बनाना चाहती है, तो इसके दो विकल्प हैं:
- विधानसभा से विधेयक पारित कराना
- राज्यपाल से अध्यादेश जारी कराना
सरकार की मंशा है कि इस नई प्रणाली को तेजी से लागू किया जाए, इसलिए समय की दृष्टि से राज्यपाल के माध्यम से अध्यादेश लाना अधिक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।
क्या है पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली?
कमिश्नरेट सिस्टम देश के कई बड़े महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, भोपाल और इंदौर में पहले से लागू है। इस प्रणाली में किसी शहर की पुलिस व्यवस्था की सर्वोच्च कमान एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के पास होती है, जिसे पुलिस कमिश्नर कहा जाता है। यह अधिकारी आमतौर पर डीजी, एडीजी या आईजी रैंक का होता है।
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पुलिस कमिश्नर को मिलेंगे ये अधिकार
कमिश्नरेट प्रणाली के तहत पुलिस कमिश्नर को कलेक्टर व कार्यपालक मजिस्ट्रेट के कई अधिकार मिल जाते हैं, जैसे:
- धारा 144 लागू करने का अधिकार
- कर्फ्यू लगाने का निर्णय
- धरना, प्रदर्शन, रैली की अनुमति देना
- आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई
- बड़े सार्वजनिक आयोजनों को मंजूरी देना
- जिला बदर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के आदेश
इससे पुलिस को किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति मिलेगी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिक प्रभावी होगी।
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कलेक्टर के अधिकार होंगे सीमित
कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद कलेक्टर की भूमिका राजस्व और भूमि प्रशासन जैसे कार्यों तक सीमित रह जाएगी। कानून-व्यवस्था, धरना-प्रदर्शन और अनुमति से जुड़े सारे कार्य सीधे पुलिस कमिश्नर के अधीन आ जाएंगे।
एसपी और आईजी की भूमिका में बदलाव
इस व्यवस्था में लॉ एंड ऑर्डर की पूरी जिम्मेदारी पुलिस कमिश्नर के पास होगी। यदि पूरा जिला कमिश्नरेट सिस्टम के अंतर्गत आता है, तो जिले के एसपी रैंक के अधिकारियों को डीसीपी (डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस) के रूप में पुनः नियुक्त किया जा सकता है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसपी (रूरल) की नियुक्ति की जा सकती है।




