बिलासपुर। जिले में गेवरारोड-मेमू हादसा ने साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (SECR) प्रशासन की सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, मेमू के लोको पायलट विद्या सागर को साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल होने के बावजूद पैसेंजर ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। रेलवे के नियमों के मुताबिक, एप्टीट्यूड टेस्ट पास न करने वाले लोको पायलट को केवल विपरीत परिस्थितियों में ही ट्रेन चलाने की अनुमति होती है।
मिली जानकरी के मुताबिक, विद्या सागर को महीने भर पहले प्रमोट कर पैसेंजर ट्रेन की कमान सौंप दी गई थी। यह खुलासा हादसे के तीसरे दिन हुआ। लालखदान के पास हुए इस हादसे में विद्या सागर समेत 11 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक यात्री घायल हुए।
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एसईसीआर के मुख्य विद्युत इंजीनियर एवं परिचालन अधिकारी राजेंद्र कुमार साहू के 14 नवंबर 2024 के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि एप्टीट्यूड टेस्ट पास न करने वाले लोको पायलट को मेमू ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी। इसका उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और मैनपॉवर की बर्बादी रोकना था।
आदेश के अनुसार, केवल वही लोको पायलट मेमू ट्रेन चला सकते हैं, जिन्होंने एप्टीट्यूड टेस्ट में उपयुक्तता साबित की हो। टेस्ट पास न करने वाले लोको पायलट को केवल गंभीर परिस्थितियों में ही असिस्टेंट लोको पायलट के साथ ट्रेन चलाने की अनुमति है। इसके अलावा, मेमू ट्रेन चलाने से पहले पैसेंजर और सीनियर लोको पायलट गुड्स की ट्रेनिंग के दौरान मनोवैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य है।




