नई दिल्ली। मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर नया ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ विधेयक लाने की तैयारी में है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज लोकसभा में वीबी-जी राम-जी बिल पेश करेंगे। यह विधेयक मनरेगा की जगह लेगा, लेकिन नाम बदलने पर कांग्रेस सहित विपक्ष का कड़ा विरोध है। बिल पेश करने के दौरान संसद में हंगामा होने की संभावना है।
प्रस्तावित विधेयक में काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 की जाएगी तथा राज्यों पर वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ेगी। केंद्र सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण रोजगार को नई गति मिलेगी। विधेयक ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका सुनिश्चित करने के लिए नया विधायी ढांचा प्रस्तावित करता है। सरकार का दावा है कि यह ग्रामीण विकास में बड़ा बदलाव लाएगा।
‘वीबी-जी राम-जी’ बिल का पूरा नाम ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी राम जी) विधेयक है, जिसे लोकसभा सदस्यों में वितरित किया जा चुका है। यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 को निरस्त कर देगा। मनरेगा ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार की कानूनी गारंटी देने वाला ऐतिहासिक कानून रहा है।
नया विधेयक स्थापित सामाजिक सुरक्षा कानून को बदलने वाला है, इसलिए लोकसभा में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव की संभावना है। विपक्ष की आपत्तियों से संसदीय कार्यवाही बाधित हो सकती है।
केंद्र सरकार के अनुसार, विधेयक ग्रामीण रोजगार को ‘नई गति’ देगा तथा ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करेगा। विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस ने विधेयक पर कड़ा विरोध जताया तथा कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि की खोखली और पाखंडी प्रकृति दर्शाता है। विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि विधेयक 2025 अधिकार-आधारित गारंटी की आत्मा पर हमला है, जो राज्यों और मजदूरों के खिलाफ है तथा महात्मा गांधी के आदर्शों का उल्लंघन करता है।




