कांकेर। जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के आलदंड गांव में एक आदिवासी युवक के साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किए जाने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि पुलिस ने जंगल में पूछताछ के नाम पर युवक की बेरहमी से पिटाई की और उसके गुप्तांग को डंडे से दबाकर शारीरिक यातना दी।
पीड़ित युवक की पहचान दसरु पद्दा, पिता चैतू के रूप में हुई है। बताया गया कि उसे माओवादियों से जुड़े होने के शक में रोका गया और नाम पूछने के बाद मारपीट शुरू कर दी गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिटाई इतनी गंभीर थी कि दसरु की हालत बिगड़ गई।
आरोप है कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उसे किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने के बजाय झोलाछाप डॉक्टर के पास भेज दिया गया। इससे उसकी हालत और बिगड़ गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में पुलिस उसे कोडोनार लेकर गई, जहां एक बार फिर उसके साथ मारपीट की गई।
घटना को लेकर इलाके में आक्रोश का माहौल है। आदिवासी समाज और परिजनों का कहना है कि नक्सल अभियान की आड़ में निर्दोष ग्रामीणों को डराया जा रहा है और उन पर झूठे आरोप लगाकर अत्याचार किए जा रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं ने विशेष रूप से पाखंजूर थाना प्रभारी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
फिलहाल पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन मामला गंभीर होने के कारण मानवाधिकार संगठनों और प्रशासन की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि जांच के नाम पर लीपापोती होती है या वास्तव में पीड़ित आदिवासी युवक को न्याय मिल पाता है।




