नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत से होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाने का आदेश जारी कर दिया है। यह निर्णय बुधवार, 6 अगस्त को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह अतिरिक्त शुल्क रूस से जुड़े देशों पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। ट्रंप ने पिछले सप्ताह इस निर्णय की घोषणा की थी, जिसे अब अमल में लाया गया है।
इस फैसले पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। हमारे आयात बाजार आधारित हैं और इनका उद्देश्य 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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कांग्रेस का सरकार पर हमला
इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं कि अमेरिका हमें ब्लैकमेल कर रहा है। भारत ने कभी भी इस तरह की ब्लैकमेलिंग के आगे घुटने नहीं टेके हैं। प्रधानमंत्री मोदी को इंदिरा गांधी के दौर से सीख लेनी चाहिए। उस समय भारत ने अपने आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया था।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 11 वर्षों में कई बार देश के हितों के बजाय अपनी छवि को प्राथमिकता दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार प्रधानमंत्री हिम्मत दिखाएंगे और अमेरिका से मजबूती के साथ भारत के हितों की रक्षा करेंगे।
भारत-अमेरिका संबंधों में नया तनाव
ट्रंप के इस फैसले से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव आ सकता है। भारत पहले ही रूस से तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना का सामना कर रहा है। अब इस टैरिफ के चलते दोनों देशों के संबंधों में नई चुनौती खड़ी हो गई है।




