गरियाबंद। देवभोग तहसील स्थित तेल नदी से अवैध रेत परिवहन में लगे 18 ट्रैक्टरों को जब्त किया गया है। यह कार्रवाई जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू के नेतृत्व में की गई। जब्त किए गए सभी ट्रैक्टरों को देवभोग थाना के सुपुर्द किया गया है। इस कार्रवाई के बाद ट्रैक्टर मालिकों और चालकों में नाराजगी देखी गई, जिसके चलते वे एसडीएम कार्यालय पहुंचकर विरोध जताने लगे।
ग्राम पंचायतों की सक्रियता और स्वप्रेरित जनभागीदारी से हो रहे जल संरक्षण के प्रयास प्रशंसनीय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
ट्रैक्टर मालिकों का पक्ष
प्रह्लाद बीसी, सुशील पांडे सहित अन्य ट्रैक्टर मालिकों का कहना है कि सरकार ने विधानसभा में पीएम आवास निर्माण के लिए रेत परिवहन में छूट देने की घोषणा की थी, इसके बावजूद कार्रवाई क्यों की गई, यह सवाल खड़ा हो रहा है। सिनापली निवासी विद्याधर ध्रुव ने पंचायत प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया जिसमें आवासीय हितग्राहियों के लिए रेत परिवहन की अनुमति का जिक्र था, लेकिन अधिकारियों ने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए कार्रवाई को जायज ठहराया।
रेत माफिया की भूमिका पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि रेत परिवहन बंद होने के बावजूद कुछ गिरोह प्रति ट्रैक्टर 300 रुपए की अवैध उगाही कर रहे थे। कुछ ट्रैक्टरों को 600 रुपए की भंडारण रॉयल्टी पर्ची भी दी गई थी, जबकि रेत भंडारण स्थल की जगह सीधे घाट से उठाई जा रही थी। इतना ही नहीं, पुरना पानी घाट में रात के अंधेरे में फोकलेन मशीन से हाइवा वाहनों द्वारा रेत की आपूर्ति की जा रही थी।
दोहरी शिकायत, एकतरफा कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, माइनिंग विभाग की टीम को दो शिकायतें प्राप्त हुई थीं—एक अवैध परिवहन की, दूसरी भंडारण और उगाही से संबंधित। लेकिन कार्रवाई केवल अवैध परिवहन पर हुई, जबकि भंडारण और अवैध वसूली पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे लोगों में संदेह और आक्रोश है।
इस कार्रवाई से देवभोग इलाके में रेत परिवहन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।




