जांजगीर। जिले में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 32 लाख से अधिक की भारी रकम ठग ली। ठगों ने खुद को केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी और व्हाट्सएप पर फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर डराया। ठगी का शिकार हुए पीड़ित ने अब पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
पीड़ित रिटायर्ड कर्मचारी, जिसे बनाया गया निशाना
मिली जानकरी के अनुसार, जांजगीर निवासी तुषारकर देवांगन वर्ष 2022 में सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 3 जुलाई से 17 जुलाई 2025 के बीच उन्हें लगातार कॉल आए, जिनमें कॉल करने वालों ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी विजय खन्ना और सीबीआई की प्रोसेसिंग अधिकारी रश्मि शुक्ला बताया।
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ठगों ने बताया कि उनके नाम पर एक मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड है, जिसका इस्तेमाल अपराधों में किया जा रहा है और इसकी शिकायत मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में दर्ज है। इसके बाद उन्हें कोलाबा पुलिस स्टेशन से कॉल आया और नरेश गोयल नामक एक व्यक्ति की फोटो भेजी गई, जिसे केनरा बैंक, मुंबई के एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बताया गया।
फर्जी ATM कार्ड और गिरफ्तारी वारंट भेजकर डराया
इसके बाद फिर विजय खन्ना और रश्मि शुक्ला ने देवांगन के नाम से जारी एक फर्जी एटीएम कार्ड की तस्वीर भेजी और कहा कि उनके नाम से खाता खोलकर उसमें मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है। पीड़ित को व्हाट्सएप पर एक फर्जी ‘डिजिटल अरेस्ट वारंट’ भी भेजा गया और कहा गया कि उम्रदराज होने के कारण उनकी गिरफ्तारी को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है।
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ठगी का तरीका: “जांच के लिए” खाते में ट्रांसफर कराएं पैसे
ठगों ने पीड़ित को विश्वास दिलाया कि यदि उनके खाते में मौजूद रकम सही है तो जांच के बाद लौटा दी जाएगी, लेकिन यदि वह मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित पाई गई तो जब्त कर ली जाएगी। डर के माहौल में तुषारकर देवांगन ने 3 जुलाई से 17 जुलाई के बीच फोन पे और नेट बैंकिंग के माध्यम से कुल 32 लाख 54 हजार 966 रुपये साइबर ठगों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
सच सामने आने पर पुलिस से किया संपर्क
18 जुलाई से सभी कॉल करने वालों के नंबर बंद हो गए। शक होने पर देवांगन ने गूगल से कोलाबा पुलिस स्टेशन का वास्तविक नंबर निकाला और वहां संपर्क किया, जहां से उन्हें बताया गया कि न तो ऐसा कोई केस दर्ज है और न ही ऐसे किसी अधिकारी की जानकारी है। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे बड़ी साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।




