KHABARWAAD RAJNANDGAON. शहर में इन दिनों दिन का तापमान 43 डिग्री तक पहुंच रहा है। ऐसे में दोपहर के वक्त शहर की सड़के सूनी नजर आ रही है। वहीं लोग खुद को गर्मी और लू से बचाने शीतल पेय जल का सहारा ले रहे हैं। गर्मी को देखते हुए देसी फ्रिज कहे जाने वाले मटकों की मांग बढ़ने लगी है। वहीं गर्मी की वजह से यात्री बसें खाली चल रही है।
लगभग 10-12 दिनों से राजनांदगांव शहर में भीषण गर्मी होने लगी है। इससे पहले मौसम में बदलाव के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली हुई थी। अब गर्मी के चलते दोपहर के वक्त राजनांदगांव शहर की सड़के सूनी नजर आ रही है, तो वहीं बसों में यात्री भी नाम मात्र यात्री दिखाई दे रहे हैं। लोग गर्मी से बचने शीतल पेय का सहारा ले रहे हैं। वहीं अधिकांश लोग अपने चेहरे को स्कार्फ में ढककर घर से बाहर निकल रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच शहर में देसी फ्रिज कहे जाने वाले मटकों की मांग भी बढी़ हुई है। शहर के जय स्तंभचौक रोड पर लगने वाले मिट्टी के बर्तनों की दुकान पर नल लगे हुए मटके बहुतायत में उपलब्ध है। मिट्टी के घड़े बेचने वालों का कहना है कि ग्राहकों की पसंद के अनुरूप अलग-अलग वैरायटी में मटके उपलब्ध है, जिसकी कीमत 150 से 200 रूपये तक है।
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राजनांदगांव शहर में दिन का पारा लगभग 43 डिग्री तक पहुंच रहा है। ऐसे में शहर की सड़के सूनी होने के साथ ही, बसों में भी यात्री नाम मात्र ही नजर आ रहे हैं। राजनांदगांव से कवर्धा रूट पर चलने वाले बस कंडक्टर शीतल सिंह नेताम का कहना है कि लगभग 10 दिनों से बसें खाली चल रही है।
भीषण गर्मी को देखते हुए शहर के कुछ एक जगहों पर समाज सेवियों द्वारा प्याऊ घर भी खोला गया है। वहीं चिलचिलाती धूप की वजह से शहर के ट्रैफिक सिग्नल को भी दोपहर 12:00 से शाम 4:00 बजे तक के लिए बंद किया जा रहा है। ट्रैफिक सिग्नल पर छांयादार सैड नहीं होने के चलते रेड सिग्नल में लोगों को धूप में खड़े होना पड़ता है। जिससे राहत देने के लिए यातायात विभाग द्वारा यह कदम उठाया गया है।




