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    Home » सरकारी स्कूल बना तंत्र-मंत्र का अड्डा, सुबह कोयल की बलि देख सन्न रह गए बच्चे

    सरकारी स्कूल बना तंत्र-मंत्र का अड्डा, सुबह कोयल की बलि देख सन्न रह गए बच्चे

    Shrikant BaghmareBy Shrikant BaghmareSeptember 5, 2025Updated:September 5, 2025 दुर्ग संभाग No Comments3 Mins Read
    सरकारी स्कूल बना तंत्र-मंत्र का अड्डा, सुबह कोयल की बलि देख सन्न रह गए बच्चे

    दुर्ग। जिले के बोरसी के सरकारी स्कूल में शुक्रवार सुबह बच्चों ने वो नज़ारा देखा, जो शायद फिल्मों में भी न मिलता। प्रिंसिपल ऑफिस के सामने बरामदे में खून से सना पक्षी पड़ा था, चारों ओर नींबू, सिंदूर और तांत्रिक आकृतियां। कोयल की बलि चढ़ाई गई थी। बच्चे सहम गए, शिक्षक सकते में आ गए और शिक्षा का मंदिर अंधविश्वास की प्रयोगशाला में बदल गया।

    आधी रात की “कक्षा”

    स्कूल के गेट बंद थे, लेकिन किसी ने रात के अंधेरे में प्रिंसिपल ऑफिस के ठीक सामने यह तंत्र साधना की। सुबह जब बच्चे पहुंचे तो उन्होंने देखा—जहां कल ब्लैकबोर्ड पर गणित का सवाल लिखा था, आज वहां काले जादू का फॉर्मूला पड़ा था। बच्चे घबरा कर भागे, और शिक्षक भी दहशत में आ गए।

    विज्ञान की जगह बैगा

    प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची, CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। लेकिन इस बीच शिक्षकों ने “साइंस” की बजाय “श्रद्धा” पर भरोसा किया और टोटके की काट के लिए बैगा बुला लिया। बच्चों ने विज्ञान की किताबें बंद कर दीं और मंत्रोच्चारण सुनने पर मजबूर हो गए। सोचिए, जिस जगह पर बच्चों को न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण पढ़ाया जाना चाहिए था, वहां “काला जादू का आकर्षण” समझाया जा रहा था।

    वायरल वीडियो और दहशत

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग पूछ रहे हैं कि अगर स्कूलों में भी यह सब होने लगे तो बच्चों को पढ़ाई कौन सिखाएगा? अभिभावक भी चिंतित हैं—बच्चे किताबों से डरेंगे या फिर भूत-प्रेत से?

    कानून का आईना

    अब आइए सीधे कानून की किताब खोलते हैं—

    • IPC धारा 429: किसी पक्षी या जानवर को मारने पर 5 साल तक की सजा और जुर्माना। यानी कोयल की हत्या सिर्फ अंधविश्वास नहीं, बल्कि अपराध है।
    • IPC धारा 295A: धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य दंडनीय है।
    • छत्तीसगढ़ अंधविश्वास निवारण अधिनियम 2021: ऐसे कृत्यों पर सीधे कार्रवाई का प्रावधान है, आरोपी को जेल और जुर्माना दोनों हो सकता है।

    समाज पर असर

    मामूली लगने वाली ये घटना दरअसल बेहद खतरनाक है। स्कूल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित जगह होनी चाहिए, लेकिन यहां उन्हें पढ़ाई की जगह अंधविश्वास की क्लास मिली। इससे बच्चों के दिमाग में डर बैठता है और समाज में यह संदेश जाता है कि “ज्ञान से ज्यादा ताकत टोटके में है।”

    यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं और शिक्षा व्यवस्था कितनी असुरक्षित। सवाल यह है कि क्या सरकार और पुलिस इस अपराध को सिर्फ “शरारती तत्वों की करतूत” कहकर भूल जाएगी, या फिर सचमुच बच्चों को अंधविश्वास से आज़ादी दिलाने का काम करेगी?

     

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