इंदौर। सरकारी शर्तों पर क्रिश्चियन कॉलेज को वर्षों पहले आवंटित की गई भूमि अब गंभीर विवाद के केंद्र में आ गई है। इंदौर कलेक्टर द्वारा जारी शो-कॉज़ नोटिस को चुनौती देने कॉलेज प्रशासन हाईकोर्ट पहुंचा था, लेकिन कोर्ट ने कलेक्टर की कार्रवाई को वैधानिक करार देते हुए कहा कि नोटिस का जवाब देना अनिवार्य है।
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज ने भूमि आवंटन की कई महत्वपूर्ण शर्तों का उल्लंघन किया है। जांच में पाया गया कि जमीन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य से विपरीत गतिविधियों में हो रहा है। इसके अलावा कई निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए और पूर्व में दी गई चेतावनियों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसी आधार पर कलेक्टर ने पूछा था कि जब शर्तों का पालन नहीं हुआ, तो भूमि को अधिग्रहित क्यों न किया जाए।
कॉलेज प्रशासन ने हाईकोर्ट में दलील दी कि कलेक्टर का मन पहले ही बन चुका है और नोटिस महज औपचारिकता है। किंतु जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की बेंच ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह केवल शो-कॉज़ नोटिस है, कोई अंतिम आदेश नहीं। ऐसे नोटिस पर जवाब देना विधिसम्मत प्रक्रिया का हिस्सा है और बिना जवाब दिए विभागीय कार्रवाई को रोका नहीं जा सकता।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटिस एम.पी. लैंड रेवेन्यू कोड की धारा 182(2) के तहत जारी हुआ है, इसलिए यह पूरी तरह वैध है। हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई की नई तारीख तय कर कॉलेज को अपना पक्ष रखने का पूर्ण अवसर दिया जाए। इसके बाद कलेक्टर कानून अनुसार कारणयुक्त निर्णय देंगे।
हाईकोर्ट के इस आदेश से जिला प्रशासन की स्थिति मजबूत हुई है और यह संदेश साफ हुआ है कि सरकारी भूमि पर शर्तों का उल्लंघन मिलने पर प्रशासन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। अब इंदौर शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्रिश्चियन कॉलेज कलेक्टर के नोटिस पर क्या जवाब देता है और विवाद का अगला चरण किस दिशा में बढ़ता है।




