सुकमा। कभी-कभी एक गांव पूरी मानवता का चेहरा बन जाता है। शनिवार आधी रात ऐसा ही हुआ, जब जंगल की ओर से आती रोने की आवाज ने ग्रामीणों को चौंका दिया। अंधेरा था, सन्नाटा था, लेकिन आवाज साफ थी—एक नवजात की।
गांव के कुछ युवकों ने टॉर्च लेकर दिशा पकड़ी। थोड़ी दूर, झाड़ियों के बीच एक नवजात लावारिस हालत में पड़ा मिला। यह दृश्य किसी की भी रूह कंपा दे। बिना देर किए गांव की महिलाएं भी वहां पहुंचीं। बच्चे को गोद में उठाया गया, कपड़े में लपेटा गया और सुरक्षित गांव लाया गया।
सूचना मिलते ही जनप्रतिनिधि सक्रिय हुए। रात में ही एम्बुलेंस की व्यवस्था कराई गई। स्वास्थ्य अमले को तत्काल अलर्ट किया गया। खुले में पड़े रहने के कारण नवजात को कीड़े-मकोड़ों ने काट लिया था। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर मदद न मिलती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
जिला अस्पताल में शिशु का इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर है और निगरानी में रखा गया है।
ग्रामीणों ने इस अमानवीय कृत्य पर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि जिसने भी यह किया है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
एक तरफ क्रूरता की हद थी, दूसरी तरफ गांव की संवेदना। उस रात जंगल में सिर्फ एक बच्चा नहीं मिला—इंसानियत भी जिंदा मिली।




