रायगढ़। खरसिया का मैदान शुक्रवार को गवाही दे रहा था उस बदलाव की, जिसकी झलक अब छत्तीसगढ़ की हर बस्ती में दिखने लगी है। मंच से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बटन दबाया और कुछ ही पलों में प्रदेश की 69 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में कुल 647 करोड़ रुपये पहुँच गए। यह था महतारी वंदन योजना की 19वीं किस्त का ऐलान—एक और पड़ाव उस सफर का, जिसने अब तक 12,376 करोड़ रुपये सीधे माताओं और बहनों तक पहुँचाए हैं।
“ये सिर्फ हजार रुपये की मदद नहीं है, ये आत्मसम्मान का सहारा है,” मुख्यमंत्री ने महिलाओं से संवाद करते हुए कहा। “छत्तीसगढ़ की समृद्धि हमारी माताओं के सम्मान से ही संभव है।”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा—
“छत्तीसगढ़ की माताएं और बहनें अब किसी की मोहताज नहीं रहेंगी। महतारी वंदन योजना सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की गारंटी है। हमारा सपना है कि हर घर की महिला मज़बूत हो, तभी परिवार और समाज समृद्ध होगा।”
भीड़ में बैठी एक महिला की मुस्कान उस वक्त सब कुछ कह गई, जब उसने अपने फोन पर मैसेज दिखाया—किस्त की रकम खाते में जमा हो चुकी थी। “अब बच्चे की पढ़ाई की फीस भर पाऊँगी,” उसने हौले से कहा। यही इस योजना का असली चेहरा है: आर्थिक सुरक्षा के साथ उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार।
1 मार्च 2024 से शुरू हुई महतारी वंदन योजना अब तक लगातार हर महीने महिलाओं के जीवन में राहत बनकर पहुँची है। आँकड़े बताते हैं कि 69 लाख पात्र महिलाएं इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। लेकिन असली कहानी उन गाँवों और शहरों में लिखी जा रही है, जहाँ महिलाएं अब छोटे-छोटे खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहीं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा—“इस योजना ने महिलाओं को नई ऊर्जा दी है। अब वे घर की ज़िम्मेदारियों के साथ समाज में भी आत्मविश्वास से खड़ी हो रही हैं।”
राज्य सरकार का दावा है कि यह योजना सिर्फ पैसों का वितरण नहीं, बल्कि महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की ठोस शुरुआत है।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक मौजूद रहे। लेकिन असली नायक वे लाखों चेहरे थे, जिनकी ज़िंदगी में यह योजना उम्मीद की रोशनी लेकर आई है।




