मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर किए गए हमले का असर सोमवार को घरेलू शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 705.65 अंक टूटकर 81,702.52 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 182.85 अंक गिरकर 24,929.55 अंक पर पहुंच गया।
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सेंसेक्स में शामिल 30 प्रमुख कंपनियों में से इन्फोसिस, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड और इटर्नल के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के कारण बाजार में बिकवाली का माहौल बना रहा।
एशियाई बाजारों में भी नकारात्मक रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225 और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में रहे, जबकि चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट मामूली बढ़त में रहा। अमेरिकी बाजार भी शुक्रवार को कमजोर रुख के साथ बंद हुए थे।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.69 प्रतिशत बढ़कर 78.31 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जिससे तेल आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ा है।
इस भू-राजनीतिक तनाव का असर मुद्रा बाजार पर भी पड़ा। डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते सोमवार को रुपया 17 पैसे कमजोर होकर 86.72 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 86.75 पर खुला और फिर 86.72 पर स्थिर हुआ, जो पिछले बंद स्तर 86.55 के मुकाबले 17 पैसे की गिरावट दर्शाता है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को बाजार में भरोसा जताया था और 7,940.70 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी। साथ ही देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रुपये में और अधिक गिरावट फिलहाल सीमित रह सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।




