KHABARWAAD BALRAMPUR. एक महिला के लिए मां बनने का अहसास सबसे निराला होता है। गर्भ में नौ महीने तक बच्चे को पालने के दौरान मां उससे काफी जुड़ जाती है। कहते भी हैं कि दुनिया में किसी भी अन्य रिश्ते से ज्यादा जुड़ाव बच्चे का मां के साथ होता है। क्यूंकि वो दुनिया में आने से नौ महीने पहले ही अपनी मां से जुड़ जाता है। लेकिन जब किसी कारणवश गर्भ में ही बच्चे की मौत हो जाती है तो महिला टूट जाती है। ऐसे में ज़रा उस मां के बारे में सोचिये, जो पिछले पांच दिन से अपना मरा हुआ बच्चा गर्भ में रखे हुए है।
बलरामपुर के सिधमा की रहने वाली अनिमा भुइंया अपने पति साकेत के साथ छह दिन पहले गांव से शहर आई थी। अपने गांव में अनिमा आंगनबाड़ी में चेकअप करवा रही थी। जब इस दौरान उसे गर्भ में बच्चे की हलचल महसूस नहीं हुई तो वो अंबिकापुर आई। यहां सोनोग्राफी सेंटर में उसे पता चला कि उसके बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके बाद कपल मेडिकल कॉलेज पहुंचा जहां अनिमा छह दिन से एडमिट है।
Read Also- Blood Pressure : बीपी को तुरंत नियंत्रित करने के लिए अपनाएं ये उपाय
गर्भ में है मरा हुआ बच्चा
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स ने अनिमा की जांच कर उसे एडमिट कर लिया। पांच दिन से अनिमा को दवाइयां दी जा रही है। उसके गर्भ में मरा हुआ बच्चा पांच दिन से पड़ा हुआ है। दरअसल, डॉक्टर्स इंतजार कर रहे हैं कि बच्चे को नॉर्मल तरीके से ही दवाइयों के सहारे बॉडी से बाहर निकाल लिया जाए, इस वजह से वो गर्भ में बच्चे को यूं ही छोड़े हुए हैं। अगर तीन दिन तक अनिमा को दर्द नहीं होता, तब डॉक्टर्स सर्जरी के जरिये बच्चे को निकालेंगे।
Read Also- पैसा दोगुना करने का झांसा देकर 1,000,000,000 रुपए की ठगी
अंदर सड़ रही है लाश
पेट में छह दिन से मरे हुए बच्चे को रखने की वजह से महिला की जान को खतरा हो सकता है। डॉक्टर्स के मुताबिक़, गर्भ में बच्चे की मौत के दो दिन के अंदर उसे बाहर निकालना जरुरी होता है। अगर ऐसा ना किया जाए, तो मां को इंफेक्शन होने का खतरा होता है। लेकिन अगर महिला की स्थिति ठीक है, उसे किसी तरह की कोई मेडिकल समस्या नहीं हो रही है तो एक हफ्ते तक भी इसे टाला जा सकता है। फिलहाल अनिमा को लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा जा रहा है।




