रायपुर। छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित शराब घोटाला अब किसी वेब सीरीज से कम नहीं लग रहा। एक-एक करके नए-नए किरदार एंट्री ले रहे हैं, और कहानी हर एपिसोड में और पेचीदा होती जा रही है। ताज़ा एपिसोड में ईओडब्ल्यू और एसीबी की टीम ने झारखंड जेल में बंद ओम साईं बेवरेज कंपनी के डायरेक्टर—अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा—को स्पेशल प्रोडक्शन वारंट पर बुधवार देर रात रायपुर ट्रांसफर कर दिया।

कोर्ट में अगला सीन
अब शुक्रवार को दोनों “डायरेक्टर साहब” विशेष अदालत में पेश होंगे। चर्चा है कि पुलिस रिमांड की मांग होगी ताकि यह सीजन का अगला ट्विस्ट भी खुल सके—कि आखिर विदेशी शराब के इस खेल में कितने “कमीशनखोर” एक्स्ट्रा आर्टिस्ट अभी बाकी हैं।
धाराएं भी सुपरहिट
ईओडब्ल्यू ने इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) और भारतीय दंड संहिता की कई धाराएं चिपका दी हैं—420ए, 467ए, 468ए, 471ए और 120बी। यानी स्क्रिप्ट पूरी तरह से क्राइम-थ्रिलर वाली है।
पहले भी हो चुका है ‘क्लाइमेक्स’
इससे पहले इस कंपनी के मुख्य लाभार्थी विजय भाटिया को पकड़ा जा चुका है। मज़े की बात यह है कि विदेशी शराब में कमीशनखोरी पर आधारित छठवां अभियोग पत्र 26 अगस्त को ही विशेष न्यायालय रायपुर में दाखिल हो चुका है। यानी एपिसोड दर एपिसोड, कहानी लंबी होती जा रही है।
कुल मिलाकर, शराब घोटाले की यह सीरीज अब “स्कैम 1992” को भी टक्कर देती नज़र आ रही है। फर्क बस इतना है कि यहां “शेयर” की जगह “शराब” है और नायक-खलनायक दोनों ही लाइसेंसी बोतल वाले हैं।




