रायपुर की चर्चित एनआईटी चौपाटी को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। चौपाटी की दुकानें भले ही आमानाका में शिफ्ट कर दी गई हों, लेकिन विपक्ष सरकार और प्रशासन के फैसले पर सवाल उठा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को कांग्रेस नेताओं ने डिप्टी सीएम अरुण साव से मुलाकात कर मामले की पूर्ण जांच के लिए सात दिनों के भीतर उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की।
कांग्रेस का आरोप: अनुमति भी अधिकारियों ने दी, कार्रवाई भी वही कर रहे
कांग्रेस ने कहा कि नगर निगम के अधिकारियों ने ही एनआईटी चौपाटी के डिज़ाइन को मंजूरी दी थी। वर्षों तक बिना किसी आपत्ति के यह चौपाटी संचालित होती रही, लेकिन अब उन्हीं अधिकारियों ने इसे अवैध घोषित कर दुकानों को तोड़ना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासन की यह कार्रवाई अपनी गलती छिपाने और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है।
राजनीतिक दबाव में तोड़फोड़? विपक्ष का सीधा हमला
विपक्ष का आरोप है कि स्थानीय विधायक के राजनीतिक दबाव में अधिकारी बिना उचित प्रक्रिया अपनाए कार्रवाई कर रहे हैं। बिना नोटिस, बिना सुनवाई और बिना ठोस कारण के छोटे व्यापारियों की रोजी-रोटी छीन लेना, कांग्रेस के अनुसार, प्रशासन की “असंवेदनशीलता और पूर्वाग्रह” को दर्शाता है।
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गुढ़ियारी की 24 करोड़ की पाइपलाइन पर भी सवाल
चौपाटी विवाद के साथ कांग्रेस ने एक और मुद्दा उठाया—गुढ़ियारी क्षेत्र में 24 करोड़ रुपए की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन परियोजना। कांग्रेस का दावा है कि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना लाइन बिछा दी गई, जिसके कारण आज भी पाइपलाइन में पानी नहीं पहुंच रहा। नेताओं ने इसे सरकारी धन की बर्बादी और जनता के साथ धोखा बताया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
- चौपाटी विवाद की उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए
- नगर निगम और नगरीय प्रशासन के दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई
- राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जांच
- भविष्य के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति जारी की जाए
कांग्रेस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
नालंदा-2 परियोजना के बीच रेलवे का दावा बढ़ाया विवाद
एनआईटी चौपाटी पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर इसका विकास किया गया था। सरकार बदलने के बाद राज्य सरकार ने यहां नालंदा-2 प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बनाई। नवंबर 2025 में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही 15 नवंबर से चौपाटी हटाने की तारीख तय कर दी गई थी।
लेकिन इससे पहले रेलवे ने 32 दुकानदारों को नोटिस जारी कर जमीन को अपना बताते हुए दावा कर दिया। अब इस मुद्दे पर नगर निगम और रेलवे के बीच लगातार बातचीत चल रही है, ताकि दोनों पक्षों के बीच विवाद का समाधान निकाला जा सके।




