रायपुर/बस्तर। राजधानी रायपुर के मेफ़ेयर होटल में नक्सल उन्मूलन पर मंथन चल रहा है। मेज़ के चारों ओर बैठे आला अफसर, नक्शों पर झुके हुए चेहरे और अभियान की बारीकियों पर गहरी चर्चा… लेकिन इसी वक्त, सैकड़ों किलोमीटर दूर बस्तर के घने जंगलों में बारूद की गंध और गोलियों की गूंज है।
नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर की सीमाओं पर पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है। जवानों की बंदूकें दहाड़ रही हैं और घने जंगलों में हर पेड़, हर पत्थर मानो गवाह बन गया है इस जंग का। खबर है कि नारायणपुर डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) की टीम ने एक नक्सली का शव भी बरामद कर लिया है। हालांकि मृत नक्सली की अभी शिनाख्त्ती नहीं हुई है। फ़िलहाल सर्चिंग जारी है। और भी नक्सलियों के शव मिलने का दावा भी किया जा रहा है।
दो तस्वीरें, एक जंग
एक तरफ़ एयरकंडीशंड कमरे में बैठे अफसर आने वाले महीनों की रणनीति तैयार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ मिट्टी और पसीने से लथपथ जवान अपनी जान की बाज़ी लगाकर उसी रणनीति को जमीन पर उतार रहे हैं।
यही छत्तीसगढ़ की असल तस्वीर है—जहां रायपुर में योजनाएं बनती हैं और बस्तर के जंगलों में उनकी परीक्षा होती है।
सबकी नज़र बस्तर पर
मुठभेड़ की सूचना मिलते ही पुलिस मुख्यालय से लेकर बैठक कक्ष तक हर किसी की नज़र इस घटनाक्रम पर टिक गई है। यह वही वक्त है जब अफसर और जवान, दोनों अपने-अपने मोर्चे पर एक ही लड़ाई लड़ रहे हैं—नक्सलवाद के खिलाफ़।




