सुकमा। ज़रा एक पल को सोचिए… भूखे बच्चे, हाथ में थाली, आँखों में उम्मीद। वो इंतज़ार कर रहे हैं कि सब्ज़ी और दाल मिलेगी, जैसे सरकार ने वादा किया है। लेकिन थाली में परोसा जाता है सिर्फ चावल और नमक। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल तोड़ने के लिए काफी है।
मानकापाल बालक आश्रम की यही तस्वीर सामने आई है। सरकार हर महीने लाखों का फंड भेजती है ताकि बच्चों को पौष्टिक भोजन मिले, उनकी सेहत सुधरे, वे पढ़-लिखकर भविष्य संवार सकें। लेकिन यहाँ अधीक्षक ने उस फंड को ग़ायब कर बच्चों की थाली से उनका हक़ छीन लिया।
जांच में जब यह हकीकत सामने आई तो जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। प्रभारी अधीक्षक जय प्रकाश बघेल को निलंबित कर विभागीय जांच बिठाई गई। लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता—
- आखिर बच्चों का पैसा कहाँ गया?
- उनकी थाली से सब्ज़ी, दाल और फल क्यों गायब थे?
- कितने समय से बच्चों के साथ यह विश्वासघात किया जा रहा था?
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने दो टूक कहा—
“यह घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों के हक़ और भविष्य के साथ अपराध है। सरकार से फंड मिल रहा है, फिर भी बच्चों को नमक थमाना इंसानियत के खिलाफ है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि जिन आश्रमों और छात्रावासों में बच्चे सुरक्षित माहौल की उम्मीद करते हैं, वहीं अगर उन्हें थाली में सिर्फ चावल और नमक मिले तो यह हमारे पूरे सिस्टम पर सवाल है।
यह मामला सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं है। यह एक चेतावनी है—
अगर हम अपने सबसे कमजोर, सबसे मासूम बच्चों को ही सही खाना नहीं दे पा रहे, तो फिर विकास, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की बातें महज़ खोखले नारे बनकर रह जाएंगी।
बच्चों की थाली सिर्फ खाने की थाली नहीं होती, वह उनके सपनों की नींव होती है। उस थाली से सब्ज़ी-दाल छीन लेना, उनके सपनों को तोड़ने के बराबर है।




