खैरागढ़। ईमानदारी की ‘कसम’ खाने वाले पटवारी संघ का मुखिया ही जब खुद घूसखोरी में फंस जाए, तो फिर कहें भी तो क्या कहें! खैरागढ़ में आज कुछ ऐसा ही ‘चमत्कार’ हुआ, जब जिला पटवारी संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र कांडे को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने नौ हज़ार रुपयों की ‘प्रसादी’ लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
यह घटना तब हुई जब ग्राम डोकरा भाटा के एक भोले-भाले नागरिक, भागचंद कुर्रे, अपनी जमीन का काम कराने के लिए कई दिनों से पटवारी साहब के दफ्तर के चक्कर लगा रहे थे। हर सरकारी दफ्तर की तरह, यहाँ भी काम करवाने के लिए ‘सेवा शुल्क’ मांगा गया। पहले तो 10 हज़ार का ‘प्रस्ताव’ आया, लेकिन जनता की भलाई को देखते हुए ‘अध्यक्ष’ जी ने इसे 9 हज़ार में ‘मंजूर’ कर लिया।
शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था। पीड़ित भागचंद ने यह ‘चमत्कारी’ सूचना ACB को दी। आज जब पटवारी साहब ने अपना ‘ड्यूटी’ पूरी करते हुए 9 हज़ार रुपए अपनी जेब में डाले, तो उन्हें शायद पता नहीं था कि उनका अगला ‘ठिकाना’ कलेक्टर ऑफिस की बैठक नहीं, बल्कि थाने की हवालात होने वाला है।
ACB की टीम ने मौके पर जाकर कलेक्टर कार्यालय से ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने न सिर्फ खैरागढ़ बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के पटवारी भाइयों को ‘गौरवान्वित’ महसूस कराया है।
जो व्यक्ति अपने संघ का मुखिया होकर ईमानदारी का पाठ पढ़ाता हो, वही जब खुलेआम रिश्वत लेता पकड़ा जाए, तो यह पूरे सिस्टम के ‘नैतिक बल’ पर एक जोरदार व्यंग्य है। यह घटना साबित करती है कि ‘संघ’ और ‘संघर्ष’ की बातें कागजों पर अच्छी लगती हैं, लेकिन ‘असल जीवन’ में ‘लेना-देना’ ही सबसे बड़ा धर्म है।




