नई दिल्ली। साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर रविवार की रात को लगेगा। यह ग्रहण रात 11 बजे से शुरू होकर देर रात 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। वैज्ञानिक दृष्टि से यह वह स्थिति है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। सूर्य ग्रहण को धार्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इसके दौरान विशेष नियमों का पालन आवश्यक बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण राहु और केतु के प्रभाव से होता है। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का असर बढ़ जाता है और ब्रह्मांडीय ऊर्जा अस्थिर हो जाती है। ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें धार्मिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
ज्योतिषविदों का कहना है कि ग्रहण के बाद स्नान करने से इसके नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है। यह शरीर और मन को शुद्ध करने का उपाय माना जाता है। शास्त्रों में विशेष रूप से ग्रहण के बाद स्नान को आवश्यक बताया गया है। योग वशिष्ठ के अनुसार, पुत्र जन्म, यज्ञ, सूर्य संक्रांति और ग्रहण जैसी घटनाओं के बाद स्नान करके शुद्ध होना चाहिए, क्योंकि इनसे शरीर अपवित्र हो जाता है।
21 सितंबर का यह सूर्य ग्रहण न सिर्फ वैज्ञानिक अध्ययन के लिहाज से अहम है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के कारण भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।




