Khabarwaad National Desk. भारत में लोकसभा चुनाव करीब है. वोटिंग बगैर आपाधापी के हो सके, इसके लिए सरकार भारी संख्या में चुनाव कर्मियों की ड्यूटी लगाती है. ये स्कूल टीचर भी होते हैं, और सरकारी बैंकों, अस्पतालों में काम करने वाले भी. एक बार ड्यूटी लगने के बाद उससे पीछे हटने का रास्ता कुछ ही हालातों में रहता है. जानिए, कौन कर सकता है इलेक्शन ड्यूटी करने से इनकार.
किनकी ड्यूटी नहीं लगाई जा सकती
ऐसे कर्मचारी जो सरकारी संस्थानों में तो हैं, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट पर, या फिर दैनिक वेतनभोगी हों, उन्हें ये जिम्मा नहीं दिया जाता. सरकारी कर्मचारियों को जिम्मा मिलता है क्योंकि वे सरकार के कंट्रोल में रहते हैं. लोकसभा चुनाव आमतौर पर 45 से 90 दिन तक चल सकते हैं. इतने समय के लिए ये सरकारी कर्मचारी इलेक्शन कमीशन के लिए तैनात रहते हैं. अगर पति-पत्नी दोनों ही सरकारी काम करते हों, तो उनमें से एक बच्चों या बुजुर्ग पेरेंट्स की देखभाल के लिए ड्यूटी हटवाने की गुजारिश कर सकता है
इन कारणों से रद्द करवा सकते हैं ड्यूटी
– अगर ड्यूटी लगने से पहले ही किसी ने फॉरेन ट्रिप की योजना बना रखी हो जिसकी तारीख उसी समय क्लैश हो रही हो तब यात्रा की टिकट और वीजा जैसे दस्तावेज देकर ड्यूटी रुकवाई जा सकती है.
– अगर कोई दिल की या किसी और गंभीर बीमारी से पीड़ित हो, जो चुनाव के दौरान दिक्कत दे सकते हों तो भी छूट मिल सकती है, लेकिन शर्त वही कि सारे दस्तावेज देने होंगे.
– कई बार एक ही कर्मचारी की दो जगहों पर ड्यूटी लग जाती है. ऐसे में भी एक जगह की ड्यूटी रद्द हो सकती है.
– अगर कोई कर्मचारी किसी राजनैतिक पार्टी से एक्टिव तौर पर जुड़ा हो तो उसकी मौजूदगी चुनाव पर असर डाल सकती है. ऐसी स्थिति में वो खुद अपने को ड्यूटी से हटवाने का आवेदन दे सकता है.
कैसे दे सकते हैं ड्यूटी अफसर वोट
एक रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्शन कमीशन ने पोल ड्यूटी पर लगे लोगों के लिए खास सुविधा दी है. पोलिंग ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी दो तरीकों से वोट डाल सकते हैं. एक- पोस्टल बैलेट के जरिए और दूसरा- इलेक्शन ड्यूटी सर्टिफिकेट (EDC) की मदद से. EDC मिलने पर आपको उस पोलिंग बूथ पर जाना जरूरी नहीं, जहां नाम है, बल्कि अपनी कंस्टिट्यूएंसी में कहीं से भी वोट डाल सकते हैं.




