आशीष पदमवार
बीजापुर. राज्य शासन की नक्सल उन्मूलन और पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम एक बार फिर सामने आए हैं। मंगलवार को बीजापुर जिले में 41 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इनमें 12 महिलाओं सहित कुल 1 करोड़ 19 लाख रुपये के इनामी कैडर शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में पीएलजीए बटालियन नंबर 1, विभिन्न एरिया कमेटियों, प्लाटून, कंपनी और मिलिशिया इकाइयों से जुड़े सदस्य सम्मिलित हैं।
पुलिस के अनुसार इन कैडरों में दक्षिण सब जोनल ब्यूरो के 39 माओवादी शामिल हैं, जबकि तेलंगाना स्टेट कमेटी, धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन से भी सदस्य मौजूद हैं। प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास, सुरक्षा और संवाद आधारित नीति, पूना मारगेम अभियान और नियद नेल्ला नार योजना ने कैडरों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया है।
राज्य में जनवरी 2025 से अब तक नक्सल घटनाओं में शामिल 528 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 560 ने आत्मसमर्पण किया है। इसी अवधि में विभिन्न मुठभेड़ों में 144 माओवादी मारे गए। जनवरी 2024 से अब तक कुल 790 माओवादी मुख्यधारा में शामिल हुए, 1031 गिरफ्तार हुए और 202 मुठभेड़ों में ढेर हुए।
आत्मसमर्पण बीजापुर में पुलिस महानिरीक्षक, केरिपु सेक्टर अधिकारियों और पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव की उपस्थिति में किया गया। पुलिस ने बताया कि समर्पण करने वाले सभी कैडरों के पुनर्वास, कानूनी प्रक्रिया और सामाजिक पुनर्समावेशन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रत्येक व्यक्ति को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
सुरक्षा बलों की सक्रियता, जनसंपर्क, विश्वास निर्माण और लगातार अभियान संचालन को इस सफलता का प्रमुख आधार माना जा रहा है। अधिकारियों ने माओवादियों से अपील की है कि वे हिंसा, भय और भ्रामक विचारधारा को त्यागकर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की प्रक्रिया से जुड़े। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि आत्मसमर्पण करने वालों की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।




