बिलासपुर। कानून का काम अपराध रोकना है, सौदा करना नहीं। कोटा थाना क्षेत्र में सामने आए मामले ने एक बार फिर वर्दी की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांजा तस्कर से अवैध उगाही के आरोप में हेडकांस्टेबल और आरक्षक को निलंबित कर दिया गया है।
मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए हेडकांस्टेबल प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। साथ ही थाना प्रभारी से भी जवाब तलब किया गया है।
500 ग्राम गांजा, 13 साल का बच्चा और 80 हजार की डील
जानकारी के मुताबिक, नशे के खिलाफ अभियान के तहत पुलिस टीम ने रानीसागर गांव में एक कथित गांजा तस्कर के घर दबिश दी। तस्कर मौके से फरार हो गया, लेकिन घर की तलाशी में एक गांजा का पौधा और लगभग 500 ग्राम गांजा बरामद किया गया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम तस्कर के 13 वर्षीय बेटे को थाने ले आई। नाबालिग को देखकर थाना प्रभारी ने उसे पकड़ने का कारण पूछा और निर्देश दिया कि बच्चे को छोड़कर उसके पिता को पकड़ा जाए। इसके बाद बच्चे को छोड़ दिया गया।
आरोप है कि इसी बीच हेडकांस्टेबल और आरक्षक ने तस्कर के परिजनों से 80 हजार रुपये लेकर मामला रफादफा कर दिया। न तो गांजा की वैधानिक जब्ती की कार्रवाई हुई और न ही आरोपी तस्कर के खिलाफ तत्काल कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
एसएसपी की सख्ती, टीआई से मांगा जवाब
गांजा जब्ती के मामले में लेनदेन की जानकारी मिलने पर एसएसपी ने तत्काल पूछताछ की। थाना प्रभारी ने अवैध लेनदेन की जानकारी से इनकार किया, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
थाना प्रभारी को कड़ी फटकार लगाते हुए पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। तस्कर की तलाश जारी है।
सवाल सिर्फ दो लोगों पर नहीं, पूरी व्यवस्था पर
यह मामला केवल 80 हजार रुपये की अवैध उगाही का नहीं है। यह उस भरोसे का मामला है, जो जनता वर्दी पर करती है। जब नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाली टीम ही समझौते के आरोपों में घिर जाए, तो संदेश क्या जाता है?
एक ओर नशे के खिलाफ अभियान, दूसरी ओर उसी अभियान के नाम पर सौदेबाजी, यह दोहरी तस्वीर पुलिस तंत्र की साख को चोट पहुंचाती है।
अब देखना होगा कि विभागीय जांच कितनी पारदर्शी होती है और क्या यह कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रहती है या जिम्मेदारी की परतें और ऊपर तक खुलती हैं।
कानून का डर अपराधियों में होना चाहिए, वर्दी में नहीं। यही इस पूरे घटनाक्रम का असली सवाल है।




