नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने गोवा में लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रहे एक पाकिस्तानी नागरिक की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनका मुव्वकिल 2016 से गोवा में रह रहा है, लेकिन केंद्र सरकार ने अचानक पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द कर उन्हें भारत छोड़ने का आदेश दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित जवाब देते हुए कहा, “फिर वापस चले जाओ।”
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यह मामला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए सख्त कदमों के बाद सामने आया है, जिसमें पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द करना भी शामिल है। गोवा में रहने वाले इस पाकिस्तानी नागरिक ने इस फैसले के खिलाफ अर्जेंट मैटर के रूप में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष आया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उसने हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। वकील ने बताया कि पुलिस ने याचिकाकर्ता के पास जाकर कार्रवाई की थी। इसके बाद अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में पाकिस्तान के छह सदस्यों वाले परिवार को वीजा समाप्त होने के बाद भी देश में रहने की अनुमति दी थी, जब तक उनकी नागरिकता के दावे की जांच पूरी नहीं हो जाती। अदालत ने उस समय यह कहा था कि परिवार को तुरंत वापस नहीं भेजा जाएगा ताकि उनके अधिकारों का सम्मान किया जा सके।
यह मामला दो देशों के बीच संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे और सुरक्षा चिंताओं के बीच नागरिक अधिकारों की टकराहट को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे गंभीरता से सुनना इस बात का संकेत है कि नागरिकों के हक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।




