नई दिल्ली। देश में एक मार्च 2027 को होने वाली जनगणना के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यह ऐतिहासिक बदलाव सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान भी लागू किया जाएगा। इससे देश की राजनीतिक संरचना में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
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विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और डिजिटल मैपिंग के जरिए सटीक जनसंख्या आंकड़े और क्षेत्रीय विभाजन तैयार किए जाएंगे। इससे परिसीमन आयोग को संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन करने में तकनीकी रूप से सहायता मिलेगी और यह प्रक्रिया लगभग 18 महीनों में पूरी की जा सकती है।
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गौरतलब है कि 2002 में किए गए 84वें संविधान संशोधन के तहत लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों की संख्या में बदलाव पर 2026 तक रोक लगा दी गई थी। लेकिन इस संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया था कि 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा। जनगणना 2027 के बाद यह प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
संभावना जताई जा रही है कि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा की कुल सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाई जा सकती है, ताकि तेजी से बढ़ती आबादी और क्षेत्रीय असंतुलन को बेहतर तरीके से प्रतिनिधित्व दिया जा सके। दक्षिण भारत के कई राज्य इस मुद्दे पर चिंतित हैं, क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि दर कम रही है, जिससे उन्हें सीटों की संख्या में नुकसान हो सकता है।
इसके साथ ही, महिला आरक्षण कानून के लागू होने से प्रत्येक लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की जाएंगी, जो देश की राजनीति में लैंगिक संतुलन लाने की दिशा में अहम कदम होगा।




