नई दिल्ली। मध्य-पूर्व एक बार फिर गहरे तनाव की चपेट में आ गया है। इजरायल द्वारा ईरान की राजधानी तेहरान पर की गई एयरस्ट्राइक में अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 329 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। गुरुवार को ईरान के सरकारी मीडिया ने इसकी पुष्टि की। यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।
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ईरान के कई सैन्य और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए इजरायल ने अब तक 5 चरणों में हमले किए हैं। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये हमले पूरी तरह योजनाबद्ध और लक्षित थे। इन हमलों में अब तक 20 से अधिक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारियों की मौत की खबर है।
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तबरीज में भीषण बमबारी, पहले से की गई थी तैयारी
इजरायल ने उत्तरी ईरान के तबरीज शहर में 10 अलग-अलग ठिकानों पर हमला किया। इजरायली अधिकारियों ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन से पहले हथियार और ड्रोन ईरानी सीमाओं के भीतर पहुंचा दिए गए थे, जिनके ज़रिए हमले को अंजाम दिया गया। रॉयटर्स के अनुसार, हवाई हमलों में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख और एयरोस्पेस फोर्स कमांडर अमीर अली हाजीजादेह भी मारे गए हैं।
ईरान ने परमाणु वार्ता से हटाया कदम
तेहरान पर हुए हमलों के कुछ घंटों बाद ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ चल रही परमाणु वार्ता से औपचारिक रूप से पीछे हटने का ऐलान कर दिया। ईरानी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि,
“इस तरह के आक्रामक और उकसावे वाले कृत्यों के बाद किसी भी प्रकार की बातचीत का आधार नहीं रह जाता।”
ट्रंप का बयान, बढ़ सकती है कूटनीतिक उथल-पुथल
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा,
“ईरान के पास अभी भी दूसरा मौका है अगर वे समझौता करना चाहें।”
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान स्थिति को शांत करने के बजाय और भड़काने वाला हो सकता है। इस घटनाक्रम के बाद संयुक्त राष्ट्र, रूस और चीन सहित कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है।
मध्य-पूर्व की यह ताजा जंग न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन गई है, बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा को भी गंभीर चुनौती दे रही है।




