रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल्द ही बिजली की नई दरें जारी की जा सकती हैं। राज्य में विद्युत दरों के निर्धारण के लिए छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बीच बिजली वितरण कंपनी CSPDCL ने दरों में करीब 20 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की है। कंपनी ने खुद को करीब 4947 करोड़ रुपये के घाटे में बताते हुए सभी उपभोक्ता श्रेणियों में “युक्तिसंगत” दर वृद्धि की आवश्यकता जताई है।
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बिजली वितरण कंपनी का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उसे बिजली आपूर्ति के लिए लगभग 23,450 करोड़ रुपये के राजस्व की आवश्यकता होगी, जबकि मौजूदा दरों पर कंपनी को लगभग 24,654 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। यानी उसे चालू वर्ष में लगभग 1204 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो सकता है। हालांकि, बीते वर्षों का 6150 करोड़ रुपये का संचयी घाटा जोड़ने के बाद कंपनी खुद को 4947 करोड़ रुपये के नुकसान में मान रही है।
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अगर नियामक आयोग दरों में बढ़ोतरी का फैसला करता है, तो यह नई सरकार के कार्यकाल में पहली बार होगा जब बिजली की दरें बढ़ेंगी। कांग्रेस सरकार के दौरान भी दो बार बिजली की दरें बढ़ाई जा चुकी हैं। कोरोना महामारी के बाद 2021-22 में बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी, 2022-23 में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि 2023-24 में कोई बदलाव नहीं हुआ। हाल ही में 2024-25 में दरों में 4.88 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। इस तरह पिछले चार वर्षों में कुल मिलाकर लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
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उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2021-22 में 200 यूनिट की खपत पर बिजली का बिल करीब 800 रुपये आता था, जो अब 2024-25 में बढ़कर 860 रुपये हो गया है। यदि इस बार भी दरों में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है, तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
जनसुनवाई के दौरान बिजली दरों में संभावित वृद्धि को लेकर विरोध भी सामने आया है। घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर किसानों तक ने दरें न बढ़ाने की मांग की है। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी प्रस्तावित बढ़ोतरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे जनविरोधी कदम बताया है।




