नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को जब डिजिटल इंडिया मिशन की शुरुआत की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह पहल भारत को टेक्नोलॉजी की दुनिया में इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचा देगी। आज यह मिशन अपनी 10वीं वर्षगांठ मना रहा है और यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन और डिजिटल क्रांति बन चुका है, जिसने आम आदमी के जीवन को पूरी तरह बदल दिया है।
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जहां पहले सरकारी दस्तावेजों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, वहीं अब वही काम मोबाइल और कंप्यूटर के ज़रिए चंद मिनटों में घर बैठे हो रहा है। आधार कार्ड, डिजिलॉकर, ई-हॉस्पिटल, उमंग ऐप जैसी सेवाएं हर नागरिक की ज़िंदगी का हिस्सा बन गई हैं। ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अब अपने मोबाइल से ऑनलाइन बैंकिंग का लाभ उठा रही हैं और छात्र डिजिटल लर्निंग से पढ़ाई कर पा रहे हैं।
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भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा डेटा उपयोगकर्ता
2015 में इंटरनेट का उपयोग शहरों तक सीमित था, लेकिन आज भारतनेट प्रोजेक्ट के तहत लाखों गांवों तक ऑप्टिकल फाइबर पहुंच चुका है। भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा डेटा कंज्यूमर बन गया है। खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल शिक्षा और टेलीमेडिसिन ने लोगों की मदद की। स्कूल ऑनलाइन हुए, डॉक्टर वीडियो कॉल पर परामर्श देने लगे — ये सब डिजिटल इंडिया की नींव के बिना संभव नहीं होता।
यूपीआई ने बदल दिया लेन-देन का तरीका
आज से 10 साल पहले जहां अधिकतर लोग नकद में लेन-देन करते थे, अब वहां UPI और QR कोड से भुगतान करना आम बात है। सड़क किनारे चाय वाले से लेकर मॉल तक हर जगह डिजिटल पेमेंट स्वीकार किए जाते हैं। UPI सिस्टम ने भारत को दुनिया में डिजिटल भुगतान का ग्लोबल लीडर बना दिया है।
युवाओं को मिला डिजिटल प्लेटफॉर्म
डिजिटल इंडिया ने युवाओं के लिए फ्रीलांसिंग, डिजिटल मार्केटिंग, ऐप डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में अवसर खोले। स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी योजनाओं ने इसमें नई ऊर्जा भर दी। पिछले 10 वर्षों में भारत में हजारों स्टार्टअप्स पनपे हैं जो आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं।
डिजिटल इंडिया अब केवल योजना नहीं, नए भारत की पहचान बन चुकी है।




