रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में नक्सलवाद एक बार फिर सियासी बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और कुरुद से विधायक अजय चंद्राकर के बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। चंद्राकर ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नक्सली कांग्रेस के दामाद हैं, जिसके बाद कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अजय चंद्राकर ने मीडिया से बातचीत में कहा, कांग्रेस ने जिस तरह दामादों का स्वागत किया जाता है, उसी तरह नक्सलियों का स्वागत किया है। जैसे कहा जाता है कि आइए, आपको कुछ नहीं कहना, देखना नहीं, वैसा ही कांग्रेस का रवैया नक्सलियों के प्रति रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सल समस्या की जड़ में कांग्रेस की विफलताएं रही हैं।
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उन्होंने आगे कहा, 1980 के दशक में जब कांग्रेस की एकछत्र सत्ता थी, तब भी आदिवासी अंचलों की घोर उपेक्षा की गई। वहां कोई विकास नहीं हुआ, जिससे असंतोष पनपा और नक्सलवाद को जमीन मिली। कांग्रेस की सरकारों ने केवल आदिवासियों का शोषण किया, उनके हक और अधिकारों की अनदेखी की।
चंद्राकर के इस बयान पर कांग्रेस ने पलटवार करने में देर नहीं लगाई। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने चंद्राकर के बयान को झूठा, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण बताया। उन्होंने कहा, आज जो कुछ भी हो रहा है, वह भाजपा की नीतियों का परिणाम है। सरगुजा और बस्तर जैसे संवेदनशील इलाकों में वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। औद्योगीकरण के नाम पर जंगल उजाड़े जा रहे हैं और कॉरपोरेट घरानों को खुली छूट दी जा रही है।
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उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, आज अदानी और अंबानी का जिस तरह से स्वागत हो रहा है, वह किसी दामाद से कम नहीं। अजय चंद्राकर पहले यह बताएं कि अदानी-अंबानी किसके दामाद हैं? भाजपा सरकार की नीतियों ने ही आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन से बेदखल किया है।




