नई दिल्ली
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यमन इस समय भीषण गृहयुद्ध की स्थिति में है और देश का अधिकांश हिस्सा हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है। इसी बीच भारत के केरल राज्य की एक नर्स निमिषा प्रिया को यमन में हत्या के आरोप में 16 जुलाई को फांसी देने की तारीख तय की गई है। निमिषा को यमन के नागरिक तलाल महदी की हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया है। यह सजा यमन के कानून के तहत गोली मारकर दी जाएगी, जो वहां का सबसे आम और क्रूर सजा देने का तरीका है।
कौन हैं निमिषा प्रिया
निमिषा प्रिया केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2011 में यमन का रुख किया था। वहां उन्होंने एक नर्स के रूप में काम करना शुरू किया। कुछ वर्षों बाद, 2015 में, उन्होंने यमन की राजधानी सना’आ में एक मेडिकल क्लिनिक की स्थापना की, जिसमें तलाल अब्दो महदी नामक यमनी नागरिक ने उनकी मदद की। उस समय आर्थिक परेशानियों के चलते उनके पति और बेटी भारत लौट आए थे।
क्या है मामला
कुछ समय बाद तलाल ने फर्जी दस्तावेज बनाकर खुद को निमिषा का पति घोषित कर दिया और उनका शारीरिक व मानसिक शोषण करने लगा। वह निमिषा का पासपोर्ट जब्त कर चुका था और धमकियों व पैसों की उगाही में भी लिप्त था। परेशान होकर, 2017 में निमिषा ने यमन से भागने की योजना बनाई। इसी दौरान उन्होंने तलाल को कथित तौर पर नींद की गोलियों की अधिक मात्रा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद निमिषा को गिरफ्तार किया गया और 2018 में अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।
यमन में कैसे दी जाती है फांसी
यमन में फांसी का तरीका अत्यंत भीषण होता है। दोषी को ज़मीन पर गलीचे या कंबल पर पीठ के बल लिटाया जाता है। इसके बाद एक जल्लाद ऑटोमेटिक राइफल से दोषी की पीठ पर गोलियां दागता है। डॉक्टर पहले ही उस स्थान को चिह्नित करता है जहां दिल होता है, ताकि निशाना वहीं लगाया जाए।
भारत सरकार की ओर से अब तक कूटनीतिक स्तर पर कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए निमिषा प्रिया को बचा पाना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।




