लखनऊ: अवैध धर्मांतरण मामले में आरोपी छांगुर बाबा की गिरफ्तारी से पहले की फरारी की कहानी अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। आलीशान जीवन जीने वाला छांगुर बाबा, जिसने बलरामपुर में 40 कमरों वाली कोठी बनवाई थी और हर सुविधा से लैस था, फरारी के दौरान यूपी एटीएस से बचने के लिए बेहद मामूली हालात में छुपा हुआ था। वह करीब 80 दिन तक लखनऊ के विकास नगर इलाके के एक सस्ते होटल के छोटे कमरे में अपनी करीबी नीतू उर्फ नसरीन के साथ रुका रहा।
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जानकारी के अनुसार, होटल का एक दिन का किराया मात्र एक हजार रुपये था। बाबा के साथ नीतू के अलावा एक वकील भी था, जो कमरा बुक कराने में मदद कर रहा था। होटल में रजिस्ट्रेशन के दौरान दोनों ने आधार कार्ड भी दिया। छांगुर बाबा ने अपने आधार में नाम ‘छांगुर’ और नीतू ने ‘नीतू नवीन रोहरा’ दर्ज कराया।
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गौरतलब है कि पिछले साल उत्तर प्रदेश एटीएस ने छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन के खिलाफ बड़े स्तर पर अवैध धर्मांतरण रैकेट संचालित करने का मुकदमा दर्ज किया था। इस साल अप्रैल में छांगुर बाबा के बेटे महबूब और सहयोगी नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया गया। इसके ठीक आठ दिन बाद 16 अप्रैल को छांगुर बाबा लखनऊ पहुंचा और होटल स्टार रूम्स में नीतू के साथ रुका।
छांगुर बाबा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को उसके इस फरारी प्लान की जानकारी मिली। माना जा रहा है कि इतने दिनों तक छिपे रहने में बाबा को कई अन्य सहयोगियों का भी समर्थन मिला, जिसकी जांच एटीएस कर रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामले में आरोपी कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि एक प्रभावशाली बाबा है, जिसके नेटवर्क और गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, नीतू उर्फ नसरीन भी इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा रही थी और जल्द ही उससे भी विस्तार से पूछताछ की जा सकती है।
अब जब छांगुर बाबा की फरारी की परतें खुल रही हैं, यूपी एटीएस उसकी पूरी नेटवर्किंग और वित्तीय स्रोतों की भी छानबीन कर रही है।




