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    Home » सुप्रीम कोर्ट का आदेश: छत्तीसगढ़ सरकार दो माह में गठित करे भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण, पालन न होने पर होगी कार्रवाई

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश: छत्तीसगढ़ सरकार दो माह में गठित करे भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण, पालन न होने पर होगी कार्रवाई

    Shrikant BaghmareBy Shrikant BaghmareJuly 20, 2025Updated:July 20, 2025 trending No Comments3 Mins Read
    सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: निजी जगह पर महिला की सहमति के बिना फोटो या वीडियो बनाना नहीं है अपराध

    नई दिल्ली/बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को दो महीने के भीतर भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण का गठन करने का सख्त निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयसीमा में यह कार्य नहीं हुआ, तो राज्य सरकार के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह आदेश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ निवासी बाबूलाल की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव के माध्यम से दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया था कि राज्य में वर्षों से भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण का गठन नहीं हो सका है, जिससे मुआवजा और ब्याज से जुड़ी सैकड़ों अर्जियां लंबित पड़ी हैं।

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    हाईकोर्ट ने की थी याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने माना मुद्दा गंभीर
    इससे पहले यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका के रूप में दायर किया गया था, जिसे अदालत ने जनहित का विषय मानने से इनकार करते हुए खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहां शीर्ष अदालत ने इसे किसानों और भूमि स्वामियों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना।

    राज्य सरकार ने दी प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी
    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि 28 अप्रैल 2025 के आदेश के बाद प्राधिकरण गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि यह प्राधिकरण वर्षों से निष्क्रिय पड़ा है और अब इसे और टालना उचित नहीं होगा।

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    2018 से लंबित हैं आवेदन
    एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव ने बताया कि 2018 में नया भूमि अधिग्रहण अधिनियम लागू हुआ था, जिसमें अनुच्छेद 5(a) के तहत मुआवजे या अन्य विवादों पर एक वर्ष के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य है। निर्णय नहीं होने की स्थिति में मामला भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, लेकिन प्राधिकरण के अभाव में यह प्रक्रिया संभव नहीं हो पा रही है।

    प्रभावितों के अधिकार रहेंगे सुरक्षित
    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्राधिकरण के अभाव में भी याचिकाकर्ता या अन्य प्रभावित व्यक्तियों के मुआवजे और ब्याज के दावे सुरक्षित रहेंगे। उन्हें उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा।

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    अगली सुनवाई 15 सितंबर को
    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को तय की है, जिसमें यह मूल्यांकन किया जाएगा कि राज्य सरकार ने अदालत के निर्देशों का पालन किया या नहीं।

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