नई दिल्ली/लंदन। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच वर्षों की चर्चा और रणनीतिक प्रयासों के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आखिरकार हस्ताक्षर हो गए हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम किएर स्टॉर्मर की लंदन में मुलाकात के दौरान इस ऐतिहासिक समझौते पर सहमति बनी।
इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार में रुकावटें कम होंगी और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही, वैश्विक मंच पर भारत और ब्रिटेन की आर्थिक भागीदारी और प्रतिस्पर्धा को नई मजबूती मिलेगी।
क्या मिलेगा आम लोगों को फायदा?
इस डील से भारत और ब्रिटेन के आम उपभोक्ताओं को दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन प्रोडक्ट्स और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर कीमतों में राहत मिल सकती है। क्योंकि इन उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) या तो खत्म हो जाएंगे या काफी कम कर दिए जाएंगे। हालांकि कुछ खास वस्तुएं ऐसी भी हो सकती हैं जिनकी कीमतें बढ़ेंगी, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ सकता है।
कब शुरू हुई थी बातचीत?
भारत-यूके FTA की बातचीत की शुरुआत जनवरी 2022 में तत्कालीन ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के कार्यकाल में हुई थी। इसका लक्ष्य 2024 तक समझौता पूरा करना था, जिसे अब 2025 में अमलीजामा पहनाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगा और द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या होता है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दो या अधिक देशों के बीच किया गया वह समझौता होता है, जिसमें वे एक-दूसरे के देश में आयात-निर्यात किए जाने वाले उत्पादों पर टैरिफ (Import Duty) को खत्म या कम करने पर सहमत होते हैं। इसका उद्देश्य व्यापार को सुगम बनाना, लागत कम करना और आर्थिक विकास को गति देना होता है।




