नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में एक हफ्ते तक जारी गतिरोध के बाद अब राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े गंभीर मुद्दों पर बहस की शुरुआत हो रही है। आज से लोकसभा और राज्यसभा में पहलगाम आतंकी हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर जोरदार चर्चा होनी है। यह बहस संसद के इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने
सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्ष दोनों इस चर्चा को लेकर पूरी तरह मोर्चा संभाले हुए हैं। कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी कर तीन दिनों तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
खास बात यह है कि दोनों पक्षों ने 16-16 घंटे की लंबी बहस पर सहमति जताई है, जो आम तौर पर तय समय से अधिक है। इससे यह स्पष्ट है कि दोनों खेमे इस मुद्दे को राजनीतिक और रणनीतिक रूप से बेहद गंभीर मानते हैं।
राज्यसभा में हंगामा, कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित
दूसरी ओर, राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा। उपसभापति हरिवंश ने जब शून्यकाल की कार्यवाही शुरू की और आंगनबाड़ी से जुड़े मुद्दे पर बोलने की अनुमति दी, तभी विपक्ष ने शोरगुल शुरू कर दिया। हंगामे के चलते उपसभापति ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।
लोकसभा में भी टकराव, स्पीकर ओम बिरला ने जताई नाराजगी
लोकसभा में आज से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा की शुरुआत होनी थी और शुक्रवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में सभी दलों के फ्लोर लीडर्स ने नियमित संचालन पर सहमति भी जताई थी। लेकिन सत्र की शुरुआत होते ही विपक्ष ने बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन के मुद्दे पर हंगामा शुरू कर दिया।
इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भड़क उठे। उन्होंने कहा, “प्रश्नकाल में देशहित के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, आप नारेबाजी करते हैं, पर्चियां फेंकते हैं – आखिर आप प्रश्नकाल क्यों नहीं चलने देना चाहते?” उन्होंने विपक्ष के नेताओं से अपने सांसदों को समझाने की अपील भी की।




