Malegaon Blast Verdict: महाराष्ट्र के मालेगांव में 2008 में हुए बम धमाके के मामले में गुरुवार को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद सियासी हलकों में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। जहां कुछ नेता कोर्ट के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कई नेता और पीड़ित परिवार इसे न्याय में चूक और पीड़ितों के साथ नाइंसाफी बता रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू
Malegaon Blast Verdict: फैसले के बाद भाजपा के पूर्व नेता और हैदराबाद की गोशमहल सीट से विधायक टी राजा सिंह ने कहा कि, आज फिर एक बार कांग्रेस का हिंदू विरोधी चेहरा देश के सामने आ गया है। 2008 के मालेगांव ब्लास्ट में फंसाए गए सभी भगवाधारी आज बाइज्जत बरी हो गए हैं। आज धर्म की जीत हुई है और भगवाधारियों की भी जीत हुई है।
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पीड़ित पक्ष नाराज़, हाई कोर्ट में अपील की तैयारी
Malegaon Blast Verdict: दूसरी ओर, मालेगांव ब्लास्ट के पीड़ित परिवारों ने कोर्ट के इस फैसले पर नाराजगी जताई है। पीड़ित पक्ष के वकील एडवोकेट शाहिद नदीम ने कहा, कोर्ट ने बम धमाके की पुष्टि की है, लेकिन सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है। हम इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे और स्वतंत्र रूप से अपील दायर करेंगे।
क्या था मामला?
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के मालेगांव में एक बम धमाका हुआ था। यह धमाका उस समय हुआ था, जब लोग नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद की ओर जा रहे थे। इस विस्फोट में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। धमाके के अगले ही दिन, 30 सितंबर को आजाद नगर थाने में कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के बाद NIA ने साध्वी प्रज्ञा सहित सात लोगों को आरोपी बनाया था।




