रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार का कैबिनेट विस्तार किसी “धीमी आंच की खिचड़ी” से कम नहीं। खुशबू इतनी फैली है कि पूरे रायपुर से लेकर दिल्ली तक सब “झांका-झांकी” कर रहे हैं, लेकिन प्लेट में परोसने लायक अभी कुछ नहीं है।
कहानी ये थी कि आज शाम तीन नए मंत्रियों ”खुशवंत साहेब, राजेश अग्रवाल और गजेंद्र यादव” का ऐलान हो जाएगा। वजह भी सुनिए: CM साय जापान दौरे पर निकलने वाले हैं, तो सोचा गया कि पहले कैबिनेट में मसाला डाल दिया जाए। लेकिन हुआ उल्टा। ऐलान की जगह अफवाहों का तड़का लग गया। मतलब मंत्रियों के नाम की घोषणा से पहले ही “व्हाट्सऐप कैबिनेट” बन चुका है।
हरियाणा फार्मूला, राज्यपाल से मुलाकात, और हाईकमान की हरी झंडी, इन सब तर्कों के बीच असली सच्चाई यही दिख रही है कि साय कैबिनेट की खिचड़ी को पूरी तरह गलने में अभी महीना-डेढ़ महीना और लगने वाला है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा और अफवाहों की रेस
- गजेंद्र यादव – दुर्ग से विधायक, और बिहार चुनाव के बहाने उनका नाम हवा में तैर रहा है।
- खुशवंत साहेब – सतनामी समाज के नेता, और आरंग से विधायक। राजनीति में दावा इतना मजबूत कि उनका नाम लगातार लिस्ट में ऊपर घूम रहा है।
- राजेश अग्रवाल – भी चर्चाओं की कतार में।
इसके अलावा कुछ पुराने मंत्री, कुछ नए चेहरे और महिला विधायकों के नाम भी चर्चाओं में तैर रहे हैं। यानी कैबिनेट की लिस्ट से ज्यादा बड़ी हो गई है “गॉसिप लिस्ट”।
यह वही खिचड़ी है जिसमें चावल भी ज्यादा हैं, दाल भी, लेकिन पतीला छोटा। सबको जगह कहां से मिलेगी? सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरी तक, हर जगह लिस्ट वायरल है। मंत्री बनते-बनते कई लोग पहले ही “व्हाट्सऐप मंत्री” बन चुके हैं। दिल्ली से हरी झंडी मिली है, लेकिन सिग्नल अभी भी “रेड” पर अटका है। जनता को मंत्री नहीं चाहिए, काम चाहिए। लेकिन राजनीति में काम से ज्यादा दिलचस्पी इस बात में होती है कि “किसको कुर्सी मिली और किसको सिर्फ मिठाई।”
छत्तीसगढ़ का कैबिनेट विस्तार एक ऐसा टीवी सीरियल है जिसका “प्रोमो” हर हफ्ते आता है, लेकिन असली एपिसोड कब प्रसारित होगा ये सिर्फ लेखक (हाईकमान) ही जानता है। तब तक जनता और नेता दोनों अफवाहों की खिचड़ी से ही पेट भर रहे होते हैं।




