बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को राहत नहीं मिल सकी है। हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें नई याचिका दाखिल करने की छूट दी है।
कोर्ट की सख़्त टिप्पणी
चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर चैतन्य बघेल चाहें तो दोबारा याचिका दाखिल कर सकते हैं, लेकिन अगली बार याचिका सीधे उनकी ओर से ही होनी चाहिए, किसी और के नाम से नहीं। चैतन्य की ओर से EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।
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पक्षकारों की दलीलें
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा। वहीं, चैतन्य बघेल की ओर से सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन और हर्षवर्धन परगनिया ने पैरवी की।
फिलहाल रायपुर जेल में रहेंगे चैतन्य
ED ने 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें रायपुर की विशेष अदालत ने 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। 23 अगस्त को कस्टोडियल रिमांड खत्म होने के बाद उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 6 सितंबर तक रायपुर जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इससे पहले ED ने 5 दिन तक कस्टोडियल रिमांड के दौरान चैतन्य से शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े नए तथ्यों पर गहन पूछताछ की थी।




