बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने झूठी शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर के मामले में बिलासपुर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए एसपी बिलासपुर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सरोज श्रीवास का आरोप है कि 5 जून 2025 की सुबह पुलिस ने उन्हें और उनकी पत्नी को घर से उठाया और थाने ले गई। लेकिन कुछ घंटों बाद उसलापुर रेलवे स्टेशन पार्किंग में उतारकर नशीली दवा बेचने का झूठा केस दर्ज कर दिया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पूरा घटनाक्रम पड़ोसी के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है। वहीं पुलिस ने उनके घर का सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिया, लेकिन थाने का फुटेज देने से इनकार कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष न्यायाधीश ने पहले ही आदेश दिया था कि सुबह 6 बजे से 11 बजे तक का फुटेज सुरक्षित रखा जाए।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. बिभु दत्ता गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और पुलिस की कार्रवाई संदिग्ध प्रतीत हो रही है। अदालत ने साफ किया कि इस मामले में पारदर्शी जवाब देना अनिवार्य है। अब अगली सुनवाई में बिलासपुर एसपी को हलफनामा पेश करना होगा।




