नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने शुक्रवार को कहा कि इस हादसे में पायलट को दोषी ठहराने का कोई आधार नहीं है और इलेक्ट्रिकल खराबी सहित अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जा रही है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) तथा विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने हादसे की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की थी। पीठ ने पुष्कराज सभरवाल से कहा, “यह दुर्घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन आपको यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि आपके पुत्र को दोषी ठहराया जा रहा है।”
जांच में उभरे दो विपरीत मत
अहमदाबाद हादसे में 260 यात्रियों की मौत के बाद AAIB की अंतिम रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। शुरुआती जांच में पायलट द्वारा दोनों इंजनों के फ्यूल कटऑफ स्विच जानबूझकर बंद करने की थ्योरी सामने आई थी। कई स्वतंत्र रिपोर्टों में दावा किया गया कि फ्लाइंग पायलट ने नॉन-फ्लाइंग पायलट-इन-कमांड कैप्टन सभरवाल से बार-बार पूछा कि इंजन क्यों बंद किए गए और अगले छह सेकंड में यह सवाल कई बार दोहराया गया।
वहीं अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के ब्रायन बेडफोर्ड ने रॉयटर्स को बताया कि बोइंग फ्यूल कंट्रोल यूनिट में कोई मैकेनिकल खराबी नहीं पाई गई। किसी भी अंतरराष्ट्रीय नियामक ने बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल समस्या के कारण ग्राउंड करने का आदेश नहीं दिया है।
इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की नई थ्योरी
एविएशन विशेषज्ञ रिचर्ड गॉडफ्रे की स्वतंत्र रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों इंजनों का आइडल से नीचे शटडाउन ई/ई बे में पानी घुसने के कारण हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल कंप्यूटर (CCR) और इंजन इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल (EEC) के बीच डिजिटल लिंक में अस्थायी खराबी आने पर इंजन स्वतः आइडल मोड में चले जाते हैं। थ्रस्ट लीवर पोजीशन का डेटा खोने पर सुरक्षा की दृष्टि से दोनों इंजन आइडल पर सेट हो जाते हैं और कनेक्शन बहाल होने पर स्वतः री-स्टार्ट होने की कोशिश करते हैं।
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने सरकार से सभी बोइंग 787 विमानों के इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गहन जांच कराने की मांग की है, क्योंकि इस मॉडल में बार-बार इलेक्ट्रिकल समस्याएं दर्ज की गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।




