रायगढ़। उधार का पैसा वापस लेने के लिए लोग नोटिस भेजते हैं, कोर्ट जाते हैं, या फिर रोज़ फोन पर तकादा करते हैं। लेकिन रायगढ़ के एक व्यापारी ने जो किया, उसने पूरे शहर को ठिठक कर देखने पर मजबूर कर दिया।
कोसा कपड़ा व्यवसायी मनोज देवांगन अपने बकाया की मांग लेकर सड़क पर उतरे, मगर नारेबाजी के साथ नहीं, बल्कि आस्था और प्रतीक के सहारे। उन्होंने एक ट्रॉली में काली माता का दरबार सजाया। माता की प्रतिमा, फूल-मालाएं और सजावट के बीच लगी थीं उन व्यापारियों की तस्वीरें, जिन पर उनका पैसा बकाया है। फिर परिवार के साथ वे शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए अलग-अलग मंदिरों तक ‘कर नापते’ पदयात्रा पर निकल पड़े।
दृश्य असामान्य था। ट्रॉली आगे बढ़ रही थी, पीछे लोग जिज्ञासा से जुड़ते जा रहे थे। कोई वीडियो बना रहा था, कोई वजह पूछ रहा था। और वजह थी – डेढ़ करोड़ रुपये की अटकी देनदारी।
बताया जा रहा है कि मनोज देवांगन ने व्यापार के दौरान अपने ही समाज के करीब छह व्यापारियों को कपड़ा उधार में दिया था। समय बीतता गया, पैसा नहीं लौटा। बार-बार आग्रह, तकादा, बातचीत – सब बेअसर। जब आर्थिक दबाव बढ़ा और उम्मीद टूटने लगी, तब उन्होंने यह अनोखा रास्ता चुना।
यह विरोध सिर्फ पैसों की मांग नहीं था, बल्कि एक संदेश भी था – व्यापार विश्वास पर चलता है, और जब वही टूट जाए तो नुकसान सिर्फ जेब का नहीं, भरोसे का भी होता है।
मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। कारोबारी को समझाइश दी गई और कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है। अब देखना यह है कि यह अनोखा विरोध उधारी की रकम वापस दिला पाता है या नहीं।
फिलहाल रायगढ़ में चर्चा एक ही है – जब उधार ने परेशान किया, तो व्यापारी ने दरबार सजा दिया।




