रायपुर। राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने सोमवार को मीडिया से चर्चा करते हुए साफ कहा कि वीरेंद्र सिंह तोमर का करणी सेना से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में संगठन की कमान प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह परिहार के हाथों में है और सभी गतिविधियां उन्हीं के नेतृत्व में संचालित होती हैं।
मकराना ने बताया कि हाल ही में वीरेंद्र सिंह तोमर द्वारा करणी सेना के नाम का दुरुपयोग करने की शिकायतें सामने आई हैं। इस मुद्दे पर संगठन की बैठक भी बुलाई गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि करणी सेना का नाम किसी भी निजी स्वार्थ या अवैध गतिविधि के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि करणी सेना पूरी तरह सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए समर्पित संगठन है और इसका किसी भी गैर-कानूनी कार्य से कोई लेना-देना नहीं है।
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फरार चल रहे तोमर बंधु
वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर पहले से ही कानून के शिकंजे में हैं और फिलहाल फरार चल रहे हैं। उनकी संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं, इसके बावजूद वे करणी सेना के नाम का सहारा लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मकराना ने जनता और मीडिया से अपील की कि वे संगठन की आधिकारिक घोषणाओं को ही सही मानें और भ्रामक जानकारी फैलाने वाले लोगों से सावधान रहें।
आलीशान बंगला कुर्क
प्रशासन ने फरार तोमर ब्रदर्स की ऐशो-आराम की जिंदगी पर बड़ा प्रहार किया है। 23 अगस्त को एसडीएम एन.के. चौबे की मौजूदगी में भाठागांव स्थित उनका आलीशान बंगला कुर्क कर लिया गया। इस संपत्ति में दोनों भाइयों का 1500-1500 वर्गफीट हिस्सा है। कार्रवाई सीजेएम के आदेश के बाद की गई और अब कोर्ट की अनुमति के बिना इस घर में न तो कोई बदलाव हो सकेगा और न ही इसे बेचा जा सकेगा।
इससे पहले रायपुर नगर निगम ने रोहित तोमर के अवैध ऑफिस पर बुलडोज़र चलाकर उसे जमींदोज कर दिया था। पुलिस की याचिका पर कोर्ट ने अंतिम चेतावनी देते हुए 18 अगस्त तक दोनों भाइयों को पेश होने का मौका दिया था, लेकिन वे अदालत में हाजिर नहीं हुए और पिछले दो महीने से फरार चल रहे हैं।




