रायपुर। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने भाजपा जिला कार्यालय, एकात्म परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शराब घोटाला, कोल घोटाला और महादेव सट्टा एप जैसे मामलों ने छत्तीसगढ़ को देशभर में बदनाम किया है, और इसके लिए सीधे तौर पर भूपेश बघेल जिम्मेदार हैं। साव ने कहा कि इन भ्रष्टाचार के मामलों के कारण ही जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
डिप्टी सीएम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी में भी अब भूपेश बघेल की स्वीकार्यता खत्म हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक बघेल अपनी सरकार के दौरान हुए घोटालों पर पर्दा डालने के लिए इस तरह की राजनीति करते रहेंगे? उन्होंने कहा कि बघेल न सिर्फ प्रदेश का कीमती समय और संसाधन बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी को भी इसमें झोंकते जा रहे हैं।
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चोरी ऊपर से सीनाजोरी
साव ने आर्थिक नाकेबंदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह पहली बार देखा गया कि भ्रष्टाचार के पक्ष में नाकेबंदी कर निर्दोष आम जनता को सजा देने की कोशिश की गई। लेकिन प्रदेश की जनता ने इस षड्यंत्र को विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग, श्रमिक संगठन और आम नागरिक खुलकर इस विरोध में सामने आए और उन्होंने प्रदेश की गरिमा की रक्षा की।
क्या भूपेश बघेल को अब श्रीराम और हिंदुत्व अन्याय लगते हैं?
श्रीराम को लेकर भूपेश बघेल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साव ने कहा कि बघेल जिस प्रकार अपने पिता नंदकुमार बघेल के विचारों का समर्थन कर रहे हैं, वह चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब बघेल को हिंदुत्व और श्रीराम जैसे मुद्दे अन्याय लगने लगे हैं? उन्होंने कहा कि पहले वे अपने पिता के बयानों से असहमति जताते थे, लेकिन अब वही विचारधारा अपना ली है।
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भ्रष्टाचार को उपलब्धि मान रहे भूपेश?
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को लेकर भी अरुण साव ने भूपेश बघेल पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि बघेल यह कहकर गर्व महसूस कर रहे हैं कि उनके बेटे को अब देश जान गया है। साव ने सवाल किया कि क्या किसी पिता को यह गर्व होना चाहिए कि उसका बेटा आर्थिक अपराध के मामले में देशभर में चर्चित हो गया?
ईडी की जांच और आरोप
साव ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले के चलते राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपये की आपराधिक आय (पीओसी) प्राप्त हुई थी, जिसे उसने अपनी रियल एस्टेट फर्मों के माध्यम से वैध बनाने की कोशिश की। इसके अलावा, उस पर 1000 करोड़ रुपये से अधिक की पीओसी को संभालने और कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को ट्रांसफर करने का भी आरोप है।
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भूपेश को नाकेबंदी में है महारत
साव ने अंत में कहा कि जब कांग्रेस शासन में थी, तब कोल, महादेव एप, चावल, शराब, पीएससी जैसे कई घोटालों के माध्यम से प्रदेश की आर्थिक प्रगति की नाकेबंदी की गई थी। आज जब सत्ता हाथ से चली गई है, तब भी भूपेश बघेल वही नाकेबंदी की मानसिकता अपनाए हुए हैं।




