मुंबई। भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक ‘शोले’ 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई थी। यह फिल्म आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है और हिंदी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है। फिल्म के हर किरदार ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी थी, जिनमें अभिनेता असरानी का जेलर वाला किरदार आज भी लोगों की यादों में बसा है। हाल ही में अभिनेता असरानी का 20 अक्टूबर को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जब पूरा देश दिवाली मना रहा था।
‘शोले’ के निर्माण से जुड़ी कई रोचक बातें वर्षों बाद भी लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बनी हुई हैं। इस फिल्म में असरानी ने अंग्रेजों के जमाने के जेलर का यादगार किरदार निभाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें इस रोल के लिए 15 हजार रुपये की फीस दी गई थी, जो फिल्म की बाकी प्रमुख कास्ट की तुलना में काफी कम थी।
‘शोले’ का निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था और इसे जी.पी. सिप्पी ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म की कहानी सलीम-जावेद की लेखन जोड़ी ने लिखी थी। तीन करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म उस दौर की सबसे बड़ी हिट साबित हुई थी और लगभग 35 करोड़ रुपये की कमाई की थी।
फिल्म के कलाकारों में अमिताभ बच्चन ने ‘जय’, धर्मेंद्र ने ‘वीरू’, हेमा मालिनी ने ‘बसंती’, जया बच्चन ने ‘राधा’, संजीव कुमार ने ‘ठाकुर बलदेव सिंह’ और अमजद खान ने ‘गब्बर सिंह’ का किरदार निभाया था।
फीस के मामले में धर्मेंद्र को सबसे ज्यादा डेढ़ लाख रुपये मिले थे। संजीव कुमार को 1.25 लाख, अमिताभ बच्चन को 1 लाख, हेमा मालिनी को 75 हजार, अमजद खान को 50 हजार और जया बच्चन को 35 हजार रुपये की फीस दी गई थी। वहीं असरानी को उनके यादगार किरदार के लिए मात्र 15 हजार रुपये मिले थे।
‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’ वाला असरानी का डायलॉग आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय संवादों में गिना जाता है।




