जगदलपुर। देशभर में अपनी अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में मंगलवार की देर रात निशा जात्रा की प्राचीन रस्म पूरी की गई। इस अवसर पर बस्तर नरेश राजा कमलचंद भंजदेव ने राज परिवार, पुजारियों और परंपरागत पदाधिकारियों के साथ माता दंतेश्वरी की आराधना कर तांत्रिक पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
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अष्टमी और नवमी तिथि के बीच आधी रात को निभाई जाने वाली यह रस्म लगभग 600 साल पुरानी परंपरा है। राजा और राज परिवार के सदस्य पैदल अनुपमा चौक स्थित गुड़ी (मंदिर) पहुंचे, जहां विशेष तांत्रिक अनुष्ठान किया गया।
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पूजा के दौरान माता को भोग अर्पित किया गया और धार्मिक परंपरा के अनुसार बकरों की बलि दी गई। मान्यता है कि इस अनुष्ठान के जरिए देवी-देवताओं को प्रसन्न कर बस्तर की समृद्धि, खुशहाली और प्रेत-आत्माओं से रक्षा की कामना की जाती है।




