पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान होगा। तिरहुत की 40, सीमांचल की 24 और मगध की 26 सीटों सहित कुल 90 सीटें इस चरण में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन सीटों का परिणाम एनडीए और महागठबंधन के बीच सत्ता की लड़ाई को निर्णायक मोड़ देगा।
तिरहुत में एनडीए का मजबूत गढ़
2020 के विधानसभा चुनाव में तिरहुत प्रमंडल के पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर और मधुबनी की 40 सीटों में से एनडीए ने 31 पर कब्जा जमाया था। महागठबंधन को मात्र नौ सीटें मिली थीं। तिरहुत की इस मजबूत पकड़ ने ही एनडीए को सत्ता तक पहुंचाया था। इस बार यदि एनडीए तिरहुत के गढ़ को बचाए रखता है और मगध में सेंध लगाता है तो उसकी स्थिति मजबूत रहेगी। वहीं महागठबंधन यदि तिरहुत में एनडीए के किले में सेंध लगाने में सफल रहा तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
सीमांचल में त्रिकोणीय मुकाबला
सीमांचल की 24 सीटें सरकार गठन की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। 2020 में यहां बीजेपी ने आठ, जदयू ने चार, कांग्रेस ने पांच, राजद और भाकपा माले ने एक-एक तथा एआईएमआईएम ने पांच सीटें जीती थीं। एआईएमआईएम की जीत ने महागठबंधन के कोर मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई थी। नतीजतन एनडीए को 12 सीटें मिली थीं। इस बार महागठबंधन अपने पारंपरिक वोटरों को एकजुट करने में जुटी है जबकि एनडीए अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। एआईएमआईएम और जनसुराज की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
मगध में महागठबंधन का दबदबा बरकरार रखने की चुनौती
मगध प्रमंडल के गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद और अरवल जिलों में महागठबंधन का पारंपरिक वर्चस्व रहा है। 2020 में गया की इमामगंज, टिकारी और बाराचट्टी सीटों पर जीतन राम मांझी की पार्टी हम ने कब्जा जमाया था। इस बार इन तीनों सीटों पर हम के प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर मिल रही है। गया शहर से बीजेपी, बेलागंज से जदयू, वजीरगंज से कांग्रेस और शेरघाटी से लोजपा रामविलास मैदान में हैं। औरंगाबाद के कुटुंबा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
दूसरे चरण का परिणाम बिहार में अगली सरकार के स्वरूप को तय करेगा। दोनों गठबंधन इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अंतिम दौर में जोर लगा रहे हैं।




