रायपुर। Chhattisgarh liquor scam case: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में आरोपी पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने विशेष अदालत (ACB/EOW) में पेशी के दौरान अपने साथ हो रहे व्यवहार को लेकर गहरी नाराजगी जताई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई पेशी में लखमा भावुक हो गए और जज के सामने कहा, मैं कोई आतंकवादी या पाकिस्तानी नहीं हूं, मुझे भी अदालत में पेश होने का हक है। उल्लेखनीय है कि 90 दिनों बाद उन्हें पहली बार वीडियो लिंक के माध्यम से कोर्ट में पेश किया गया।
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ACB-EOW ने दाखिल किया चौथा पूरक चालान
Chhattisgarh liquor scam case: राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने इस मामले में चौथा पूरक चालान विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया है। यह चालान 1100 पृष्ठों का है, जिसमें 67 बिंदुओं की समरी शामिल है। जांच दस्तावेजों के अनुसार, पूर्व मंत्री लखमा को घोटाले से लगभग 64 करोड़ रुपये की अवैध आमदनी हुई। इसके अलावा, 18 करोड़ रुपये की अवैध राशि के निवेश और खर्च के प्रमाण भी एजेंसियों को मिले हैं।
विशेष चालान में कवासी लखमा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- मंत्री पद की शक्तियों का दुरुपयोग
- नीतिगत फैसलों में अनुचित हस्तक्षेप
- टेंडर प्रक्रिया में रिश्वत के बदले लाभ पहुंचाना
- अधिकारियों की पदस्थापना में प्रभाव का इस्तेमाल
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह घोटाला एक सुनियोजित नेटवर्क के माध्यम से अंजाम दिया गया, जिसमें विभागीय अधिकारी, ठेकेदार और अन्य सहयोगी शामिल थे।
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अब तक 71 से अधिक आरोपी, 13 गिरफ्तार
Chhattisgarh liquor scam case: जांच एजेंसियों ने अब तक 71 से अधिक व्यक्तियों को आरोपी बनाया है, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी शामिल हैं। इनमें से 13 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। ACB-EOW सूत्रों के मुताबिक, कुछ और बड़े नाम भी एजेंसियों के रडार पर हैं और जल्द ही नई गिरफ्तारी हो सकती है।
न्यायिक रिमांड खारिज, जांच और गहराई में
रायपुर की विशेष अदालत ने कवासी लखमा की न्यायिक रिमांड की मांग को फिलहाल खारिज कर दिया है। ACB और EOW की संयुक्त जांच अब भी जारी है और नई जानकारियों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर घोटाले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।
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जनता की निगाहें जांच पर
इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में खलबली मचा दी है। विपक्ष लगातार सरकार और एजेंसियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं आम जनता पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है।




